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Friday, July 24, 2026

अभी नाइट है!

इश्क आसान नहीं भाईबहुत फाइट है,

माशूका राज़ी हो गई तो बाप टाइट है।

 

जोड़ी जमेगी कैसे तुम्हारी और उसकी,

चार फुटे तुमछह फुट उसकी हाइट है।

 

उसने पेंच किसी और से लड़ा लिया है,

उड़ता रह गया तुम्हारा अपना काइट है।

 

फुर्र होने की फिराक़ में है वो शायद,

ठीक सात बजे उसकी तो फ्लाइट है।

 

तुम्हें मुबारक हो तुम्हारे सतरंगी सपने,

अपनी किस्मत तो ब्लैक एंड व्हाईट है।

 

माना ये पेड़ इमली का हैआम का नहीं,

उसने कह दिया आमतो वही राइट है।

 

'वर्माने दिन में जला दिए सारे बल्ब,

उसने कह दिया जो—"अभी नाइट है!"


Thursday, July 8, 2010

हर रोग के रोगी मिलें ~~

विपक्षी मिलें, सहयोगी मिलें

संत - फ़कीर और ढोंगी मिलें

लाईलाज रोग नहीं, खुद मैं हूँ

फिर भी हर रोग के रोगी मिलें

 

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चित्र : खुद के कैमरे से

Friday, May 28, 2010

यह सोच के मैने गिफ्ट दिया था कि मना करेगी ~~

उसने उस दिन मेरे गाल पर झन्नाटा लिखा था

कोई ताड़ न पाये इसलिये मैनें सन्नाटा लिखा था

.

उसकी गली में आया था कुत्ते पीछे पड़ गये थे

पढ़कर देखते मेरे चेहरे पर ज्वार-भाटा लिखा था

.

चमन में आया था मैं चश्मे-नम करने की ख़ातिर

मेरे भाग्य में तो निगोड़ा यह सूखा कांटा लिखा था

.

यह सोच के मैने गिफ्ट दिया था कि मना करेगी

लेकर बिन बोले चल दी,  इतना बड़ा घाटा लिखा था

.

बहुत हौसला लेकर आया था मैं उसकी देहरी पर

पर उसने दरवाजे पर ओके, बाय, टाटा लिखा था

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Wednesday, May 26, 2010

अभी तो साहब आराम कर रहे हैं ~~

ये मत समझो कि दुबके हुए है डरकर

आजकल साहब बहुत काम कर रहे हैं

कुछ पल तो सुकून लेने दो, कल आना

थके हुए हैं अभी वो आराम कर रहे हैं

 

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Saturday, May 1, 2010

कला : खुजाने की

खुजाना एक कला है. खुजाया तब जाता है जब खुजली होती है. कभी-कभी खुजली उठाने के लिये भी खुजाया जाता है. खुद को खुजाने और किसी और को खुजाने में फर्क है. खुजली उठने का क्योकि कोई वक्त नहीं होता है, इसलिये खुजाने का भी कोई वक्त नहीं होता. खुजाना लाभदायक भी है और हानिकारक भी. खुजाकर जब खुजली शांत हो जाये तो ठीक वर्ना खुजाते खुजाते आप खुजली वाले स्थान को सुजा भी सकते हैं. कहाँ खुजली हो तो कैसे खुजली की जाये इसका वर्णन करूंगा, पर उसके पहले खुजली के दो प्रकार (और भी हो सकते हैं पर वे वर्ण्य विषय नहीं हैं) का उल्लेख कर दूँ :

1. शारीरिक खुजली

2. मानसिक खुजली

शारीरिक खुजली के तरीके निम्न चित्रों से अनुमान लगाईये :

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आदि-आदि

परंतु मानसिक खुजली इतना आसान नहीं है. इसके लिये मस्तिष्क का इस्तेमाल करना होता है. (कभी कभी अपवाद भी). इस पर लिखना भी मस्तिष्क वाले का काम है. किसी के पास हो तो जरूर लिखना. साबित भी हो जायेगा और मेरे दिमाग की खुजली भी शांत हो जायेगी. वैसे ब्लागजगत को इसके बारे में बताना  बेमानी ही है.

धन्यवाद

चेतावनी : खुजा-खुजा के सुजा मत लेना

Monday, April 26, 2010

दाँत नहीं पर नोचे बोटी ~~

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लगता है फिट हो गई गोटी, वाह भई वाह

सांझ ढले अंगूर की बेटी, वाह भई वाह

.

मुर्ग मुसल्लम की दावत खाने दौड़े आये

दाँत नहीं पर नोचे बोटी, वाह भई वाह

.

पानी-पानी चिल्लाते हो प्यासे अधरों से

देखो खुला छोड़ दिया टोटी, वाह भई वाह

.

कल दिखे गुलछर्रे उड़ाते कनाट प्लेस में

कहते हो किस्मत है खोटी, वाह भई वाह

.

अब क्यों माँगते सीढ़ी, किसके कहने पर

चढ़ गये तुम ऊँची चोटी, वाह भई वाह

.

सौन्दर्य प्रतियोगिता में आये हैं देखो तो

एक आँख बड़ी दूजी छोटी, वाह भई वाह

.

सौदागर सपनों के तुम अपनों के खातिर

छीन ली गरीब की रोटी, वाह भई वाह

Monday, March 1, 2010

खुले गटर अच्छे है ~~

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आपको यकीन नहीं होगा

मेरे सारे पड़ोसी

मेरे पड़ोस में ही रहते हैं

हम अपने पड़ोसी के

पड़ोस मे बसने वाले बाशिन्दे है

मेरे एक पड़ोसी का नाम छिन्दे है

उन्हें नहीं भाता है होली का रंग

होली के दिन सुबह सुबह

चढ़ा लिया भंग

पत्नी के आदेश पर

बाजार से कुछ लेने जा रहे थे

रास्ते में एक गटर खुला था

बचते बचाते गटर में

छिन्दे जा गिरे

अगले ही पल वे

गन्दगी से थे घिरे

कुछ पल को वे चेतनाशून्य हो गये

या शायद भंग की तरंग में वहीं सो गये

इस बीच एक कुत्ता वहाँ आया

सूँघते ही उसे

सृष्टि की श्रेष्ठतम रचना

मानव जाति का भान हुआ

वह दुम उठा कर भागा

इतने में छिन्दे जागा

बामुश्किल वह बाहर आया

पहचान में नहीं आ रही थी

उसकी काया.

होली के रंग से अब भी वह घबरा रहा था

दूर से ही बच्चों को डरा रहा था

बच्चे डर कर भागे

वह पीछे बच्चे आगे.

सकुशल वह घर आ गया

रंग का एक बूँद किसी ने नहीं डाला

गटर की गन्दगी से तो

वह पहले से ही था काला

*

उन्होंने लम्बी साँस लिया

मन ही मन बोले

मेरे लिये तो

खुले गटर अच्छे है

Wednesday, September 23, 2009

एक्सचेंज आफर


~~
क्या खोना क्या पाना है
आजकल एक्सचेंज आफर का जमाना है
पहुँचने से पहले ही लोग
वापस चल देते है.
पुरानी तो पुरानी नई चीज़ों को भी
आफर के चक्कर में बदल देते हैं।


मेरी पत्नी को एक्सचेंज आफर
बहुत रास आता था.
स्कूल से वापस जाकर
अक्सर अपनी प्रिय वस्तुओं को भी
घर में नहीं पाता था.
पूछने पर यही जवाब मिलता था -
क्या खोना क्या पाना है
आजकल एक्सचेंज आफर का जमाना है.

होता यह था कि
आफर के चक्कर में
वे उन्हें बदल आती थीं
बड़े शौक से बदले में मिली वस्तु
मुझे दिखाती थीं।


एक दिन बड़े प्यार से बोलीं
सुनिये जी !
मैने भी उसी लहजे में कहा
कहिये जी !
वे बोली देखिए अपना फ्रिज
कितना पुराना हो गया है -
फ्रिज नहीं ये तो कबाड़खाना हो गया है
अगर आप कहें तो
एक्सचेंज करके नया लाती हूँ.
सहमति हो आपकी तो
घर की हर चीज को
नया करके दिखाती हूँ.

मैने कहा -
भला इसमें किसे होगा ऐतराज
हर चीज को बदल कर कुछ नया लाओ
आजकल एक्सचेंज का जमाना है
मुझे भी कुछ एक्सचेंज करवाना है
छूटते ही वे बोली
ये तो मेरे लिये चुटकियों का काम है
बस तुम उस चीज़ का नाम बताओ.

मैने कहा -
तुम तो मेरे दिल की रानी हो गई हो
पर कहने में कोई शरम नहीं कि
अब तुम थोड़ी पुरानी हो गयी हो.
हो सके तो अपने को एक्सचेंज कर आना
अपने बदले किसी नई को लाना
ये तो बहुत आसान काम है
क्योंकि आजकल है
एक्सचेंज आफर का जमाना.

तभी से उनकी यह आदत छूट गयी है
अब वे पुरानी चीज़ों से ही काम चला लेती है,
पुरानी चीज़ों में ही नयापन ढूढ़ लेती हैं
उन्हें ही चमकाकर पड़ोसिनों को जला लेती हैं
~~

Wednesday, August 12, 2009

दिल बहलता नहीं तो मै क्या करूँ ~

~~~~
कसरत करके डोले बना लीजिए
सुबह-शाम नाश्ते में चना लीजिए
*
पेट के मरीज़ो सुनो मेरी बात
सुबह-सुबह पानी गुनगुना लीजिए

*
खून की कमी है आपके शरीर में
आप तो
महुए का तना लीजिए
*
मधुमेह या रक्तचाप है तो भाई
खाने में अपने
सहजना लीजिए
*
दिल बहलता नहीं तो मै क्या करूँ
आप अपने लिये झुनझुना लीजिए

*
बोल्ड / इटालिक पर चटका लगाकर देखें

Saturday, August 1, 2009

एक रिसर्च : कुत्तों पर


मैने अपने जीवन का
बहुत समय खर्च किया है
कुत्तों पर बहुत गहराई से
रिसर्च किया है.

मैं भी परम्परा निभाया है
सबसे पहले
इनके नस्ल के बारे में बताऊंगा
जो लोग सतही तौर पर देखते हैं
वे इनकी सैकड़ों नस्लें बताते हैं
मैं अपने रिसर्च के दौरान
छान आया हूँ पूरा जग
अब तो पहचानने लगा हूँ मै
इन कुत्तों की रग-रग
बेशरम हड्डी खाकर
कभी मुँह नहीं धोता है.
मेरा खोज बतलाता है
कुत्तों का केवल
दो नस्ल होता है.
एक जन्मजात कुत्तों की
तो दूसरी नस्ल है
कुत्तों के गुणों (!!) को
आत्मसात किये कुत्तों की.
पहला तो फिर भी
कम खतरनाक होता है
दूसरे का काटा तो
जीवन भर रोता है.

मेरे अध्ययन का तो
सीधा सा तर्क है
कुत्ते और गधे में
बहुत फर्क है
कोई कुत्ता
गधा नहीं बनना चाहता है
पर कुछ गधे
कुत्ते ज़रूर बन जाते हैं

एक बार इनकी सभा में
बाइज्जत मैं भी शरीक हुआ
मैने देखा कि
अपनी सभा में भी ये खुद को
बहुत कम सामने लाते हैं
मंच पर तो ये
गधों को ही बिठाते हैं
सामने की सीट पर
ये खुद बैठ जाते हैं
पिछली सीट पर
कुछ दुम दबाऊ तो कुछ
टांग उठाऊ कुत्ते बैठ जाते हैं
अगली पंक्ति में मंच के सामने
बड़े कुत्ते विराजमान होते हैं
कभी ये मेहमान तो
कभी ये मेज़बान होते हैं

सबसे खतरनाक कुत्ता
सबको चुप कराकर
माईक हाथ में ले लेता है
और बेशरम
इंसानों पर किये रिसर्च का
ब्यौरा देता है
इनकी भौंक सुनकर
सिर में दर्द होने लगा
अब बाम लूंगा
इन्हीं शब्दों के साथ
अब मैं विराम लूंगा

धन्यवाद

Friday, July 24, 2009

फायदे टांग टूटने के ---


आप सब को पता नहीं होगा
कुछ दिनों पहले
मेरी एक टांग टूट गई थी
हुआ यह कि
श्रीमती जी के आदेश के अनुपालना में
टेबुल पर चढ़कर
सजा रहा था अपना घर
गिरने से टांग टूट गयी
और चढ़ गया प्लास्टर
.
दुनिया के अजीब कायदे हैं
टांग टूटने के भी अनेक फायदे हैं
प्लास्टर चढ़ने से मेरी बांछे खिल गई
क्योंकि पहली बार मुझे
किचन से छुट्टी मिल गयी
.
टांग टूटने के बाद
पहली बार क्या-क्या हुआ
सुनेंगे आप तो
आप भी हाथ मलेंगे
यकीनन मेरी किस्मत से
आप भी जलेंगे
पहली बार मैनें --
सिर दबाने के बजाय
सिर दबवाने का सुख पाया
पहली बार मैनें --
पत्नी के हाथों नहलाये जाने का सुख पाया
पहली बार मैनें --
जानू, प्रियतम, प्राणप्यारे शब्द सुना
पहली बार --
मुझसे मिलने अनेक लोग
आने लगे और
(आने वालों में मेरी पड़ॊसन भी थी)
लोग दुनिया का
ऊँच-नीच समझाने लगे
.
एक दिन मेरे एक
अध्यापक मित्र आये
आते ही मुझे आँखे दिखाये
बोले -
स्टाफ मे तेरे कारनामों की
बहुत चर्चा है.
तुम्हें भला खुद को
उम्र से कम आँकने की
क्या जरूरत थी
टेबुल पर चढ़कर
पड़ोसी के घर में झांकने की
क्या जरूरत थी
मैंने उन्हें कहने दिया
सुखद भ्रम को बने रहने दिया
.
आप सब हंस रहे हैं
अब सताऊँगा
टांग टूटने का असली फायदा तो
अब बताऊँगा
इस देश में जहाँ
आदमी से बड़ा कुर्सी है
इसी का सुख-चैन
इसी की मातमपुर्सी है
मेरी टूटी टांग देखकर
बेमन से ही सही
अपनी कुर्सी से उठ जाते थे
और सहारा देते थे
अपनी कुर्सी पर बिठाते थे
.
तभी से टांग टूटने के सुख का
एहसास हो गया
जब से प्लास्टर कटा है
मुझे लगा
कुछ कीमती खो गया
कुछ खो गया ---
.

Friday, July 17, 2009

मैंने भी चलायी ----

चलना और चलाना
दो अलग बात है
गलना और गलाना
दो अलग बात है
चलाने पर चल जाए
जरूरी नहीं
गलाने पर गल जाए
जरूरी नहीं
स्वतः ही चल जाए
तो चला लीजिये
दाल आसानी से गल जाए तो
गला लीजिये
.
मेरे मित्र रवि जी
अग्रज 'शैल जी' की कविता
'चल गयी' सुनाते हैं
और आसानी से लोकप्रियता
भुनाते हैं
पिछले दिनों इनकी खूब चली
आपको खले न खले
मुझे बहुत खली
चल गयी सुनाते सुनाते
अपनी बाई आँख जो कि आटोमेटिक है
चला लेते हैं
और देखते ही देखते
अपनी दाल गला लेते हैं
मुझको इन्होने खूब जलाया
नर्स से सास तक
सब पर खूब चलाया
सफलता के गूढ़ मंत्र को
मैंने भी पहचान लिया
इनकी चलती देखकर
मैंने भी चलाने को ठान लिया
एक दिन
रगड़ रगड़ कर खूब नहाया
कंघी किया
पावडर लगाया
सज संवर कर
निकल पड़ा मैं
अवंतिका बाज़ार*
गली से निकलते ही
एक हसीना नज़र आयी
आव देखा न ताव
बड़े तबियत से
मैंने भी चलायी
बहुत दिनों से चलाने की प्रैक्टिस
छूटी हुई थी
परिणामतः
अगले ही पल मेरी नाक
टूटी हुई थी
हुआ यह कि
मैं चला तो रहा था बाई
पर बाई के साथ साथ
चल गयी दाईं
अर्थात मेरी दोनों आँखे बंद हो गयीं
आगे था बिज़ली का खम्भा
टक्कर से केवल नाक टूटी
यही है अचम्भा
.
नाक का टूटना
या नाक का कटना
अच्छा नहीं होता है
बड़ा बदनसीब होता है वो
जो नाक खोता है
तभी से मैंने तो सबक ले लिया
कुछ इस तरह मन को समझाया
चलाने की उम्र में नहीं चलाये
अब चलाओगे तो यही होगा
गलने वाली दाल तो गल जाती है
काली दाल गलाओगे तो यही होगा
किसी की चलती है तो चले
मेरी तो चलती ही नहीं है
गलाने की कोशिश तो की
पर क्या करू
ये दाल तो गलती ही नहीं है
दाल गलती ही नहीं है ----

*अवंतिका बाज़ार = हमारा लोकल बाज़ार

विश्व रेडक्रास दिवस

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विश्व रेडक्रास दिवस पर कविता पाठ 7 मई 2010

हिन्दी दिवस : काव्य पाठ

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हिन्दी दिवस 2009

राजस्थान पत्रिका में 'यूरेका'

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