उसने उस दिन मेरे गाल पर झन्नाटा लिखा था
कोई ताड़ न पाये इसलिये मैनें सन्नाटा लिखा था
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उसकी गली में आया था कुत्ते पीछे पड़ गये थे
पढ़कर देखते मेरे चेहरे पर ज्वार-भाटा लिखा था
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चमन में आया था मैं चश्मे-नम करने की ख़ातिर
मेरे भाग्य में तो निगोड़ा यह सूखा कांटा लिखा था
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यह सोच के मैने गिफ्ट दिया था कि मना करेगी
लेकर बिन बोले चल दी, इतना बड़ा घाटा लिखा था
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बहुत हौसला लेकर आया था मैं उसकी देहरी पर
पर उसने दरवाजे पर ओके, बाय, टाटा लिखा था


