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Friday, May 28, 2010

यह सोच के मैने गिफ्ट दिया था कि मना करेगी ~~

उसने उस दिन मेरे गाल पर झन्नाटा लिखा था

कोई ताड़ न पाये इसलिये मैनें सन्नाटा लिखा था

.

उसकी गली में आया था कुत्ते पीछे पड़ गये थे

पढ़कर देखते मेरे चेहरे पर ज्वार-भाटा लिखा था

.

चमन में आया था मैं चश्मे-नम करने की ख़ातिर

मेरे भाग्य में तो निगोड़ा यह सूखा कांटा लिखा था

.

यह सोच के मैने गिफ्ट दिया था कि मना करेगी

लेकर बिन बोले चल दी,  इतना बड़ा घाटा लिखा था

.

बहुत हौसला लेकर आया था मैं उसकी देहरी पर

पर उसने दरवाजे पर ओके, बाय, टाटा लिखा था

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Wednesday, May 26, 2010

अभी तो साहब आराम कर रहे हैं ~~

ये मत समझो कि दुबके हुए है डरकर

आजकल साहब बहुत काम कर रहे हैं

कुछ पल तो सुकून लेने दो, कल आना

थके हुए हैं अभी वो आराम कर रहे हैं

 

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Monday, March 1, 2010

खुले गटर अच्छे है ~~

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आपको यकीन नहीं होगा

मेरे सारे पड़ोसी

मेरे पड़ोस में ही रहते हैं

हम अपने पड़ोसी के

पड़ोस मे बसने वाले बाशिन्दे है

मेरे एक पड़ोसी का नाम छिन्दे है

उन्हें नहीं भाता है होली का रंग

होली के दिन सुबह सुबह

चढ़ा लिया भंग

पत्नी के आदेश पर

बाजार से कुछ लेने जा रहे थे

रास्ते में एक गटर खुला था

बचते बचाते गटर में

छिन्दे जा गिरे

अगले ही पल वे

गन्दगी से थे घिरे

कुछ पल को वे चेतनाशून्य हो गये

या शायद भंग की तरंग में वहीं सो गये

इस बीच एक कुत्ता वहाँ आया

सूँघते ही उसे

सृष्टि की श्रेष्ठतम रचना

मानव जाति का भान हुआ

वह दुम उठा कर भागा

इतने में छिन्दे जागा

बामुश्किल वह बाहर आया

पहचान में नहीं आ रही थी

उसकी काया.

होली के रंग से अब भी वह घबरा रहा था

दूर से ही बच्चों को डरा रहा था

बच्चे डर कर भागे

वह पीछे बच्चे आगे.

सकुशल वह घर आ गया

रंग का एक बूँद किसी ने नहीं डाला

गटर की गन्दगी से तो

वह पहले से ही था काला

*

उन्होंने लम्बी साँस लिया

मन ही मन बोले

मेरे लिये तो

खुले गटर अच्छे है

Thursday, July 9, 2009

कमबख्त रास्ते में एक ठेका है --


दर्जनों ‘सदाओं’ ने मुझको आकर छेका है
इल्जाम क्यों देती हो आंख भर 'सेंका' है
.
आ गया होता कब का मैं तुम्हारे दर पर
क्या करू कमबख्त रास्ते में एक 'ठेका' है
.
मेरे बहकने पर क्यो दोष देती हो, बोलो
हमारे ज़ज्बात मे तो गज़ब का 'एका' है
.
नर्सों की तीमारदारी है, अस्पताल में हूँ
प्रेम से तुमने, गमले समेत फूल फेका है
.
भंवरा कब भला ठहरता है इक दर पर?
मेरे लिये तो हरेक नया ठांव ‘यूरेका’ है।

विश्व रेडक्रास दिवस

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विश्व रेडक्रास दिवस पर कविता पाठ 7 मई 2010

हिन्दी दिवस : काव्य पाठ

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हिन्दी दिवस 2009

राजस्थान पत्रिका में 'यूरेका'

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