वह हर हाल में जीतने का आदी था। प्रतियोगिता शुरू होने से पहले ही वह अपने प्रतिद्वंद्वियों को धमकाकर, उनकी कमजोरियाँ उजागर करके और अपनी ताकत का प्रदर्शन करके उनका मनोबल तोड़ देता। अक्सर आधे मुकाबले तो मैदान में उतरने से पहले ही जीत लिए जाते थे।
लेकिन इस बार उसका सामना एक ऐसे खिलाड़ी से होने वाला था, जो न उसकी धमकियों से डरता था और न ही उसके रसूख से प्रभावित होता था।
खिलाड़ी को पहली बार अपनी हार का अंदेशा होने लगा। उसने अपने गुंडों को रास्ते में तैनात कर दिया। प्रतिद्वंद्वी जिस विमान से आ रहा था, लैंड होते ही उसे घेर लिया गया और एक गुप्त स्थान पर पहुँचा दिया गया।
निर्धारित समय पर प्रतियोगिता शुरू हुई। प्रतिद्वंद्वी का स्थान खाली था। खिलाड़ी ने स्वयंभू ढंग से खुद को विजेता घोषित कर दिया। उसके पाले हुए लोग तालियाँ बजाने लगे और उसकी 'अजेय छवि' का गुणगान करने लगे।
मीडिया के कैमरे मुस्तैदी से उसकी नकली मुस्कान को 'ऐतिहासिक जीत' के रूप में कवर कर रहे थे। बिक चुकी पुलिस बाहर पहरा दे रही थी—अपराधियों को बचाने के लिए नहीं, बल्कि सच्चाई को अंदर आने से रोकने के लिए।








