Friday, August 21, 2026

अच्छे स्कूलों से दस नुकसान

आजकल हर ओर "स्कूल सुधारो अभियान" की चर्चा है, मैंने अपने रिसर्च में पाया कि स्कूल सुधर गये तो नुकसान ही नुकसान है। शोधपत्र के कुछ बिंदु निम्नवत हैं : - 

1. बच्चे सवाल पूछने लगते हैं

फिर हर बात पर क्यों?” पूछते हैं और यह आदत परिवार से लेकर ज्यादातर सत्ता तक को बेचैन कर सकती है।

2. बच्चे तर्क करना सीख जाते हैं

हर घटना को तर्क की कसौटी पर कसने लगते हैं। वे चोरी तो हुई, पर चोर कोई नहीं हैजैसी अवधारणाओं को मानने से इनकार कर देते हैं।

3. अंधविश्वास पर संदेह करने लगते हैं

हर बात को आँख मूँदकर मानने के बजाय प्रमाण माँगने लगते हैं। इससे अंधविश्वास ही नहीं,
अंधभक्ति की जड़ें भी हिलने लगती हैं।

4. बच्चे किताबें पढ़ने लगते हैं

और किताबों में लिखी बातों पर विश्वास करने लगते हैं। नतीजा व्हाट्सऐप यूनिवर्सिटी का ज्ञान,
जो उन्हीं के टैक्स के पैसे से प्रसारित किया जाता है, फेल होने के कगार पर पहुँच जाता है।

5. बच्चों में आत्मसम्मान पैदा हो जाता है

फिर उन्हें डराकर, धमकाकर या लालच देकर आसानी से नियंत्रित करना मुश्किल हो जाता है।

6. वे गलत को गलत कहने लगते हैं

चाहे गलत करने वाला कितना ही बड़ा, प्रभावशाली या सम्मानित क्यों न हो। वे निडर होकर गलत को गलत कहने लगते हैं।

7. बच्चे बराबरी की बात करने लगते हैं

सत्ता के अचूक हथियारजाति, धर्म, अमीरी-गरीबी और पद को वे निरस्त करने लगते हैं। उन्हें इंसान दिखाई देता है, उसकी हैसियत नहीं।

8. वे सत्ता से भी सवाल पूछ सकते हैं

और सबसे बड़ा नुकसान वे सार्वजनिक रूप से घोषित कर सकते हैं कि हमारा काम सिर्फ ताली और थाली बजाना नहीं है।

9. वे अपने भविष्य का फैसला खुद लेना चाहते हैं

और अगर वे अपने भविष्य का फैसला खुद करने लगेंगे, तो उन्हें भीड़ बनाना आसान नहीं रहेगा।

10. सबसे बड़ा नुकसान
वे अच्छे नागरिक बन सकते हैं। फिर उन्हें झूठे वादों, डर, नफरत और दिखावे से बहकाना आसान नहीं रहेगा। और यही तो सत्ता का ब्रह्मास्त्र होता है।

Friday, August 14, 2026

संसद में कुत्ता

 

एक बार संसद में
एक कुत्ता घुस गया।

 

सभी सांसद
घबराकर अपनी-अपनी सीटों के पीछे छिपने लगे।

 

तभी एक अनुभवी सांसद ने कहा

 

घबराइए नहीं,
ये बेवजह नहीं काटता।

 

एक सांसद ने पूछा
तो फिर
किसे काटता है?”

 

अनुभवी सांसद मुस्कुराया

जो
इसके रास्ते में आ जाए।

 

तभी दूसरा सांसद बोला

फिर तो चिंता की कोई बात नहीं…”

पहला बोला
क्यों?”

 

वह बोला

हम तो इतने वर्षों से
सिर्फ़ रास्ते बदलने में
माहिर हैं।

 

कुत्ता कुछ देर
संसद को देखता रहा

फिर चुपचाप बाहर चला गया।

 

शायद उसे समझ आ गया था

यहाँ काटने का काम
पहले से ही
बहुत कुशलता से हो रहा है।

Sunday, August 9, 2026

भारत विकसित राष्ट्र है — संदेह करना राष्ट्र का अपमान है!

 

कुछ लोग पूछते फिर रहे हैं कि भारत विकसित राष्ट्र है या नहीं। ऐसे लोगों पर मुझे दया आती है। ये बेचारे विकास को पहचानते ही नहीं। इन्हें लगता है कि विकास का मतलब कारखानेरोजगारशिक्षास्वास्थ्य और नागरिकों का जीवन स्तर होता है। ये लोग बहुत पुरानी किताबें पढ़ते हैं।

आज विकास की परिभाषा बदल चुकी है।

सरकार यदि दिन में दस बार विज्ञापन देकर बता रही है कि विकास हो रहा हैतो फिर विकास हो ही रहा है। आखिर विज्ञापन झूठ बोलने के लिए थोड़े ही बनाए जाते हैं! अगर टीवी पर नदी साफ़ दिख रही हैतो नदी साफ़ ही होगी। जो गंदगी देख रहे हैंउन्हें शायद अपना चश्मा बदल लेना चाहिए।

औद्योगिक विकास भी खूब हुआ है। पहले लोग सिर्फ़ सामान बनाते थे। अब अवसर बनाए जाते हैं। पेपर लीक एक बड़ा उद्योग है। रिश्वत उद्योग तो इतना विकसित हो चुका है कि बिना किसी सरकारी संरक्षण के पूरे देश में फल-फूल रहा है। दलालीकमीशनफर्जीवाड़ा और चढ़ावा-प्रबंधनये सब आत्मनिर्भर भारत के सफल मॉडल हैं। इन उद्योगों की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि इनमें कभी मंदी नहीं आती।

अर्थव्यवस्था का हाल भी शानदार है। कुछ लोग कहते हैं कि रुपया डॉलर के सामने कमजोर हो रहा है। कितनी नासमझी की बात है! रुपया कमजोर नहींविनम्र हो रहा है। दुनिया को "वसुधैव कुटुम्बकम्" का संदेश देने वाला देश अपनी मुद्रा को भी अहंकारी कैसे होने देगा?

और नेताओं की संपत्ति को देखिए। चुनाव के समय जो संपत्ति शपथपत्र में होती हैपाँच साल बाद वह कई गुना हो जाती है। इससे बड़ा आर्थिक विकास और क्या होगाअगर एक जनप्रतिनिधि अपनी निजी अर्थव्यवस्था को इतनी तेजी से विकसित कर सकता हैतो मान लेना चाहिए कि देश सही हाथों में है। विकास पहले प्रतिनिधि तक पहुँचता हैफिर धीरे-धीरे जनता तक आने की तैयारी करता है। जनता को धैर्य रखना चाहिएविकास भी आखिर वीआईपी है।

अब भी यदि किसी को भारत के विकसित राष्ट्र होने पर संदेह हैतो दोष भारत का नहींउसकी आँखों का है। उसे विकास कम और वास्तविकता ज़्यादा दिखाई देती है। ऐसी दृष्टि लोकतंत्र में बहुत कष्ट देती है।

मुझे पूरा विश्वास है कि एक दिन ऐसा आएगा जब हम विकास की परिभाषा ही बदल देंगे। फिर कोई विवाद नहीं रहेगा। क्योंकि जिस देश में परिभाषाएँ बदलने की शक्ति होउसे विकसित राष्ट्र बनने के लिए किसी और प्रमाण की आवश्यकता नहीं होती।

Thursday, August 6, 2026

गधा आगे क्यों निकला?

 

एक बार घोड़ों की रेस हो रही थी। न जाने कैसेएक प्रभावशाली 

व्यक्तित्व वाला महत्वाकांक्षी गधा भी उसमें शामिल हो गया।

 

लोग हैरान थे— "भला गधा घोड़ों से कैसे जीत पाएगा?"

 

रेस शुरू हुई और कुछ देर बाद समाप्त भी हो गई।

 

नतीजा आया तो सबकी आँखें फटी की फटी रह गईं। सबसे आगे 

गधा था।

 

लोगों ने उत्सुकता से पूछा, "इतने तेज़-तर्रार घोड़ों के बीच तुम 

जीत कैसे गए?"

 

गधा मुस्कुराया और बोला

 

"मैंने बस इतना कहा था


'
तुम सब मेरे पीछे-पीछे चलोमैं तुम्हें गंतव्य तक पहुँचने का 

शॉर्टकट रास्ता बताता हूँ।'

 

बस... वे मेरे पीछे चल पड़ेचलते रहे और मैं जीत गया।"


Wednesday, July 29, 2026

भैंस का नार्को टेस्ट

 

जज: तुम्हारे ऊपर आरोप है कि जिस व्यक्ति की सुपारी तुम्हें दी गई थी, उसकी जगह तुमने किसी और की हत्या कर दी। क्या तुम अपना अपराध स्वीकार करते हो?

आरोपी: हुज़ूर, हत्या तो मैंने की है, पर यह गलती मेरी नहीं है ... गलत पता बताने वालों की वजह से गलत आदमी मर गया। चार्जशीट में दर्ज है कि मैं लाईसेंसी हत्यारा हूँ - मैं यह गलती कर ही नहीं सकता

जज: विस्तार से बताओ।

आरोपी: हुज़ूर, मुझे हिदायत दी गई थी—"अगली गली में जिस घर के आगे भैंस बैठी मिले, उसी घर के मालिक को मार देना। मैं जोर देकर कहना चाहता हूँ कि भैंस का रंग काला बताया गया था"

जज: ठीक है ... ठीक है, सारी भैंसे काली होती है यह बताओ को फिर क्या हुआ?

आरोपी: जब मैं वहाँ पहुँचा, भैंस दूसरे घर के सामने बैठी थी। मैंने समझा कि वही लक्ष्य है। आखिर मैं सुपारी किलर हूँ, सर्वेक्षक नहीं।

सरकारी वकील: यानी गलत हत्या की वजह भैंस बनी?

आरोपी: जी हुज़ूर, अगर भैंस अपनी निर्धारित जगह पर बैठी रहती, तो यह दुर्घटना कभी नहीं होती।

(कुछ देर अदालत में सन्नाटा छा जाता है।)

जज (फैसला सुनाते हुए):
अदालत ने समस्त तथ्यों, परिस्थितियों तथा भैंस की संदिग्ध गतिविधियों पर गंभीरता से विचार किया।

प्रथम दृष्टया यह प्रतीत होता है कि हत्या की वास्तविक प्रेरक, सहायक एवं परिस्थितिजन्य अभियुक्त उक्त भैंस है।

अतः

  1. वर्तमान मुकदमा तत्काल प्रभाव से खारिज किया जाता है।
  2. पुलिस भैंस के विरुद्ध भारतीय न्याय संहिता की उपयुक्त धाराओं में एफआईआर दर्ज करे।
  3. आवश्यकता पड़ने पर भैंस का नार्को टेस्ट, पॉलीग्राफ टेस्ट तथा डीएनए परीक्षण भी कराया जाए।
  4. यदि भैंस जमानत का आवेदन दे, तो उसका कड़ा विरोध किया जाए, क्योंकि उसके फरार होकर किसी अन्य घर के सामने बैठ जाने की प्रबल आशंका है।

जज (हथौड़ा बजाते हुए):
"असली अपराधी चाहे जितना शक्तिशाली हो, कानून के हाथ... भैंस तक भी पहुँच सकते हैं।"

अदालत स्थगित।

Friday, July 24, 2026

अभी नाइट है!

इश्क आसान नहीं भाईबहुत फाइट है,

माशूका राज़ी हो गई तो बाप टाइट है।

 

जोड़ी जमेगी कैसे तुम्हारी और उसकी,

चार फुटे तुमछह फुट उसकी हाइट है।

 

उसने पेंच किसी और से लड़ा लिया है,

उड़ता रह गया तुम्हारा अपना काइट है।

 

फुर्र होने की फिराक़ में है वो शायद,

ठीक सात बजे उसकी तो फ्लाइट है।

 

तुम्हें मुबारक हो तुम्हारे सतरंगी सपने,

अपनी किस्मत तो ब्लैक एंड व्हाईट है।

 

माना ये पेड़ इमली का हैआम का नहीं,

उसने कह दिया आमतो वही राइट है।

 

'वर्माने दिन में जला दिए सारे बल्ब,

उसने कह दिया जो—"अभी नाइट है!"


Monday, July 20, 2026

ज़हन का Congestion

प्यास इतनी न बढ़ाए कि dehydration हो जाए,
इश्क़ गर इकतरफ़ा रहे तो complication हो जाए।

सुबह के निकले हैंशाम हुईअब तक लौटे नहीं,
मुमकिन है यह गुमशुदगी नई sensation हो जाए।

माना छोड़ गई है तुम्हें तुम्हारे हाल पर लेकिन,
लौट आओइससे पहले हर सच illusion हो जाए।

हर कोई यहाँ निभा रहा है एक रिश्ता ए किरदार,
क्या पता रूमानियत महज़ presentation हो जाए।

राज़-ए-दिल यूँ ही गर दफ़्न रहें तो बेहतर है,
बेवजह आख़िर क्यों इनका translation हो जाए।

घुट रही है जिंदगीखुली हवा में आना होगा
इससे पहले ज़िंदगी ही suffocation हो जाए।

बहाता रहेगा इन जज़्बातों को पन्नों पर 'वर्मा',
कहीं ये ख़ामोशी ज़हन का congestion हो जाए।

विश्व रेडक्रास दिवस

विश्व रेडक्रास दिवस
विश्व रेडक्रास दिवस पर कविता पाठ 7 मई 2010

हिन्दी दिवस : काव्य पाठ

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हिन्दी दिवस 2009

राजस्थान पत्रिका में 'यूरेका'

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