Saturday, June 20, 2026

गड्डी तेरा भाई चलाएगा

 

पीकर भी जो लड़खड़ाए नहीं, तो क्या पिया,
कभी झूमे, कभी बल खाए नहीं, तो क्या पिया।

नशे का बयान — "गड्डी तेरा भाई चलाएगा",
ज़िद में ये बात दुहराए नहीं, तो क्या पिया।

दोस्तों ने जब समझाया — "अब घर चलो",
'शट-अप' चिल्लाए भी नहीं, तो क्या पिया।

सुबह उठकर कसम खाई — "अब बस, तौबा!",
शाम ढले जाम उठाए नहीं, तो क्या पिया।

माना नाक टूटी है दीवार से, बेलन से नहीं,
घर का पता भूल पाए नहीं, तो क्या पिया।

'लिटिल' और 'लवली' कह-कहकर भी जो,
बोतल पूरी गटक पाए नहीं, तो क्या पिया।

चखना न मिला, बोटी भी हुई नसीब नहीं,
नमक से काम चलाए नहीं, तो क्या पिया।

पीने से याददाश्त बढ़ती होगी अगर कहीं,
'वर्मा' का उधार चुकाए नहीं, तो क्या पिया।

Wednesday, June 17, 2026

चोर के घर चोरी

 

एक बार चोर तिजोरीलाल अपने प्रतिष्ठित रात्रिकालीन कार्य पर निकला। उसका निशाना थासेठ सुखविंदर का घर। पूरी पड़ताल के बाद उसे यह विश्वास हो चुका था कि सेठ अपने परिवार सहित कुछ दिनों के लिए शहर से बाहर गया हुआ है।

तिजोरीलाल ने पूरे इत्मीनान से अपना काम अंजाम दिया। ताले खुले, अलमारियाँ टटोली गईं, तिजोरियाँ हल्की हुईं। इस श्रमसाध्य प्रक्रिया में उसे लगभग तीन घंटे लगे। संतुष्ट मन से वह अपनी बरसों की साधना का फल समेटे घर लौटा।

लेकिन घर पहुँचते ही उसके पैरों तले ज़मीन खिसक गई।

उसके अपने घर का ताला टूटा हुआ था। भीतर जाकर देखा तो उसकी बरसों की कमाई पर कोई और हाथ साफ कर चुका था।

चोर के घर चोरी!

यह तो सरासर नाइंसाफी थी।

क्षणभर के लिए उसके मन में पुलिस को फ़ोन करने का विचार आया, मगर उसने तुरंत उसे दबा दिया। पुलिस में शिकायत दर्ज कराने के लिए चोरी गए सामानों की सूची देनी पड़ती, और सूची देते ही उसकी अपनी प्रतिष्ठा, व्यवसाय और स्वतंत्रतातीनों संकट में पड़ जाते।

काफ़ी विचार-विमर्श के बाद उसने सबसे सुरक्षित और लोकतांत्रिक रास्ता चुना।

उसने इस गंभीर घटना की सूचना चोर एसोसिएशन को दे दी।

एसोसिएशन के पदाधिकारियो में वह चोर भी था जिसने इस घटना को अंजाम दिया था. उसी की सलाह पर एक गोपनीय चांच कमेटी बनाई गई जिसका अध्यक्ष वह खुद बन गया.

सुनते हैं जांच जारी है

Saturday, June 13, 2026

प्रजा चुप क्यो थी?!

विक्रम के कंधों पर लदे वेताल ने एक कथा सुनाई—

एक नगर में एक राजा था। उसके राज्य में अपराधियों को संरक्षण प्राप्त था, स्त्रियाँ असुरक्षित थीं, भूख से लोग मर रहे थे और न्याय दम तोड़ चुका था। जब स्त्रियों को सरेआम निर्वस्त्र कर अपमानित किया जाता या अन्य जवाबदेही से बचकर राजा चुप्पी का दामन थाम लेता। आमतौर पर वह उसी समय किसी मंदिर में भव्य अनुष्ठानों का आयोजन कर धर्मरक्षक होने का स्वांग रचता।

वेताल ने पूछा—
"राजन, इतना अन्याय होने पर भी प्रजा राजा के विरुद्ध मौन क्यों थी?"

विक्रम ने वेताल के कान में उत्तर दिया—
"क्योंकि उस राज्य में धर्म, करुणा और न्याय का मार्ग न रहकर प्रदर्शन और पाखंड का उपकरण बन चुका था। लोगों को प्रश्न पूछने के बजाय जयकार करना सिखा दिया गया था।"

उत्तर सुनते ही वेताल ठहाका लगाकर फिर उसी पेड़ से जा लटका।

Wednesday, January 14, 2026

रातों-रात ऐतिहासिक विधेयक पास

1.    जिस तरह परिवहन विभाग वाहन में ज़रा-सी अनियमितता पर चालान ठोक देता है, उसी तरह अब वाहन मालिक भी सड़क की बदहाली पर सरकार का चालान काट सकेंगेगड्ढा गहरा होगा तो जुर्माना दोगुना।

2.   जिस प्रकार सरकारी कर्मचारी चुनावी सभाओं में शामिल नहीं हो सकते, उसी प्रकार अब मंत्री भी चुनाव प्रचार से वंचित रहेंगे, क्योंकि जनता ने उन्हें पोस्टर चिपकाने के लिए नहीं, काम करने के लिए चुना है।

3.   सरकारी वाहन का प्रयोग अब केवल सरकारी कार्यों के लिए होगा

सब्ज़ी, तरकारी, दूध, और रिश्तेदारों की बारात ढोने के लिए नहीं।


4.   शिलान्यास पट्टिकाओं की संख्या कार्य की गुणवत्ता से जोड़ी जाएगी

काम न हुआ तो पट्टिका भी नहीं,और दोबारा फीता काटने पर फीता काटने वाले का वेतन कटेगा।


5.   हर वादे के साथ डिलीवरी डेट अनिवार्य होगी

तारीख़ निकलने पर वादा अपने आप जुमलाघोषित मान लिया जाएगा।

सूत्रों के अनुसार यह विधेयक जनता के सपनों में सर्वसम्मति से पारित हुआ है। जागने पर इसके लागू होने की संभावना न के बराबर ज्यों-की-त्यों बनी हुई है।

शेष अगले अंक में क्रमश:

Saturday, November 1, 2025

सैलाब रक्खेंगे ....


ये तुम्हारा भरम है कि वे गुलाब रक्खेंगे
मंजिल से ठीक पहले वे सैलाब रक्खेंगे

हकीकत कही तुमसे रूबरू न हो जाये
तुम्हारे पलको पर अब वे ख्वाब रक्खेंगे
  
औंधे पडे मिलेंगे तुम्हारे सवालो  के तेवर
चाशनी से लिपटे जब वे जवाब रक्खेंगे

रख दो अपनी खिलाफत ताक पर तुम
खिदमत में वे कबाब और शराब रक्खेंगे
  
उनकी मासूमियत पर यकीन कर लेंगे
जब वे अपनी नज़रो में तालाब रक्खेंगे

लाजिमी है इस चमन का यू ही मुरझाना
जब इनकी जडो में आप तेजाब रक्खेंगे

इनकी नज़रो के आंसू भी थम जायेंगे
गर आप भी अपनी आंखो मे आब रखेंगे

Sunday, July 1, 2012

और दर्पण टूटने से बच गया … (लघुकथा)



वह दर्पण के सामने खड़ी हो गयी और बोली, “बता दर्पण ! मेरी ख़ूबसूरती के बारे में बता'”
दर्पण ने उसे निहारा और बोला, “आपसे भी खूबसूरत लोग हैं इस नगर में"
उसे गहन संताप हुआ और उसने क्रोधित होकर एक पत्थर उठा लिया और बोली, “बता दर्पण ! अब तूं मेरी ख़ूबसूरती के बारे में बता'”
दर्पण ने पत्थर देख लिया था, जोर से कहा, “आप बहुत खूबसूरत हैं" फिर धीरे से बोला “पर आपसे भी खूबसूरत लोग हैं इस नगर में"
वह प्रथम वाक्य सुनकर इतना विह्वल हुई की द्वितीय वाक्य को सुनी ही नही. और बेचारा दर्पण झूठ बोलने और टूटने से बच गया.




Monday, May 21, 2012

पीकर बेचारा किसी नाले में पड़ा होगा ….



शाम हो चुकी है भला कैसे खड़ा होगा
पीकर बेचारा किसी नाले में पड़ा होगा
.
उसकी मुस्कुराहट कर रही है चुगली
शादीशुदा नहीं शर्तियाँ वह 'छड़ा' होगा
.
आज फिर उसका चेहरा सूजा हुआ है
किसी ‘नाजनीन’ ने थप्पड़ जड़ा होगा
.
नाक कट गयी है, आँख कहीं और होगा
किसी बिजली के खम्भे से लड़ा होगा
.
‘तौहीन’ इसके लिए शान -ओ-शौकत है
इसके जेहन में शायद चिकना घड़ा होगा

विश्व रेडक्रास दिवस

विश्व रेडक्रास दिवस
विश्व रेडक्रास दिवस पर कविता पाठ 7 मई 2010

हिन्दी दिवस : काव्य पाठ

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हिन्दी दिवस 2009

राजस्थान पत्रिका में 'यूरेका'

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