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Wednesday, October 13, 2010
Sunday, July 18, 2010
खामोश क्यों हो गये प्रसंग तुम्हारे ~~
लहरों सा था जीवन संग तुम्हारे
हार गये हैं क्यों बोलो उमंग तुम्हारे
सन्दर्भों में हर पल रहने वाले
खामोश क्यों हो गये प्रसंग तुम्हारे
चित्र : शाखा से लटके हुए इमली (साभार : गुगल सर्च)
Monday, May 31, 2010
इस शहर को फख़्र है बड़प्पन का ~~
कूड़े के ढेर से जीवन चुनता है
दिन भर खुद का बोझ ढोता है
इस शहर को फख़्र है बड़प्पन का
उफ ! यहाँ तो बचपन ऐसे सोता है
चित्र : मोबाईल कैमरे से
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हिन्दी दिवस : काव्य पाठ
हिन्दी दिवस 2009
राजस्थान पत्रिका में 'यूरेका'




