Saturday, June 12, 2010

नेपथ्य में ~ नेपथ्य से बाहर (लघुकथा)

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नेपथ्य में :

माता के जागरण के लिये कुल चन्दे से आयी रकम : 23900 रूपये

माता के जागरण पर कुल खर्च : 8600 रूपये

बचत (लाभ) : 15300 रूपये

आयोजक नशे में धुत्त, संख्या में कुल तीन. तीनों ने अपने हिस्से का 5100 रूपये लिया और अपना-अपना जाम उठा लिया. 

नेपत्थ्य से बाहर :

जागरण चरमोत्कर्ष पर. माँ का गुणगान जारी :

माता तेरी लीला अपरम्पार

मेरा भी कर दे बेड़ा पार ... 

16 comments:

संजय कुमार चौरसिया said...

bahut satik vermaji
aaj kal kai jagah yahi ho raha hai

http://sanjaykuamr.blogspot.com/

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

बहुत बढ़िया...माँ बेडा पार ही तो कर रही थीं....

धर्म की आड़ में लूट है

दीपक 'मशाल' said...

सब चंदे का चमत्कार है... कई साल पहले हमारी समिति ने जो लातूर भूकंप पीड़ितों के लिए चंदा जामा किया था कुछ लोग उसमे से भी आधा मार गए था.. सच्चाई जो ऐसे सामने लाये वही लघुकथा..

honesty project democracy said...

ये दुनिया ऐसी ही है वर्मा जी सच्चे और अच्छे काम के लिए एक रुपया नहीं निकलेगी लेकिन इनको ढोंगी,पाखंडी और ठग चाहे इनसे लाखों ठग ले इनको वो मंजूर है ,ऐसे माता के जागरण करने वाले हर जगह मिल जायेंगे अब तो ,कुछ तो मजबूरी में ऐसा करते है और कुछ को ऐय्यासी के लिए पैसे चाहिए इसके लिए करते हैं ,क्या कह सकते है इंसानियत मर चुकी है ...
देते हैं भगवान को धोखा ...
इन्सान को क्या छोरेंगें ..मन्नाडे साहब वर्षों पहले गा चुकें हैं

वन्दना said...

सच को उकेरती लघुकथा।

काजल कुमार Kajal Kumar said...

एकदम सटीक सुंदर लघुकथा. धन्य हों.

सतीश सक्सेना said...

जबरदस्त वार किया है भाई जी ! हर मोहल्ले की हकीकत बयान कर गयी यह लघु पोस्ट ! शुभकामनायें !!

shikha varshney said...

यही तो होता है धर्म की आड़ में.बहुत तीखा प्रहार.

आचार्य जी said...

आईये जानें .... क्या हम मन के गुलाम हैं!

Jandunia said...

nice

AMAN said...

सटीक और ज़बरदस्त

दिलीप said...

sach hai kadva sach

संगीता पुरी said...

कॉलेजों में सरस्‍वती जी की पूजा में भी ऐसा ही होता था !!

अनामिका की सदाये...... said...

thode se shabdo me hi ek kadvi sacchayi jise ham jante hain aur fir bhi chup rah jate hai..use shabd de diye aapne.

pawan dhiman said...

Bahut dukhdaai prasang...bahut satik vyangya.

Ekta said...

सटीक
तीक्ष्ण

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