Sunday, May 23, 2010

गुलाब और जीवन (क्षणिका)

चित्र पर क्लिक करके पढ़े :

image

10 comments:

विनोद कुमार पांडेय said...

सौ आने सच्ची बात...

Suman said...

nice

दिलीप said...

waah badi sahi baat kahi

वाणी गीत said...

गुलाब में कांटे हैं उसकी रक्षा के लिए ...या काँटों की चुभन को कम करने के लिए है गुलाब ...
जो भी हो ..चित्र बहुत खूबसूरत है ...!!

honesty project democracy said...

जिस दिन हम सब यह समझ जायेंगे की दुख ही असल सुख और सच्चा है उस दिन ये संसार इंसानों की बस्ती हो जाएगी /

डॉ टी एस दराल said...

बेहतरीन नजरिया ।

उम्मेद गोठवाल said...

जीवन के सफर में गुलाब रूपी सुख व कांटों रूपी दु:ख भी है....दोनों को समभाव से सहना ही जीवन है, का सन्देश देती सशक्त रचना।

sangeeta swarup said...

सुन्दर....जीवन में फूल और कांटे दोनों ही मिलते हैं

Razia said...

जीवन के यही तो दो रंग है.
बढिया

zeal said...

Joy and woes are woven fine !

विश्व रेडक्रास दिवस

विश्व रेडक्रास दिवस
विश्व रेडक्रास दिवस पर कविता पाठ 7 मई 2010

हिन्दी दिवस : काव्य पाठ

हिन्दी दिवस : काव्य पाठ
हिन्दी दिवस 2009

राजस्थान पत्रिका में 'यूरेका'

राजस्थान पत्रिका में 'यूरेका'

हमारी वाणी

www.hamarivani.com

ब्लागोदय


CG Blog

एग्रीगेटर्स

आपका पता

विजेट आपके ब्लॉग पर

ब्लागर परिवार

Blog parivaar

लालित्य

ग्लोबल भोजपुरी