Thursday, May 6, 2010

पेट में चूहे कूद रहे थे ~~

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पेट में चूहे कूद रहे थे

मैं चूहों के पीछे भाग रही थी

अब तो कुछ सुस्ता लूँ

दो दिन से मैं जाग रही थी

 

 

14 comments:

अनामिका की सदाये...... said...

भाग भाग कर टांगे थक गयी..
इस लिए इनको उठा रही हु..
घूर के मत देखो मुझको..
मैं न कोई स्टाइल मर रही हु.

honesty project democracy said...

उम्दा विचारणीय प्रस्तुती

Suman said...

nice

sangeeta swarup said...

:):) बढ़िया ..

Razia said...

हा हा मजेदार

पी.सी.गोदियाल said...

बेहद निखटू बिल्ली निकली

महफूज़ अली said...

हा हा हा ....मज़ा आ गया...

सतीश सक्सेना said...

आज तो आप अलग ही अंदाज़ में हैं वर्मा जी

दीपक 'मशाल' said...

azab chitra gazab kavita .. ha ha ha

Jyoti said...

बहुत मजेदार..............

फ़िरदौस ख़ान said...

हा हा हा...

यशवन्त मेहता "फ़कीरा" said...

कर लो अम्मा आराम कर लो
चूहों को भी आराम रहेगा तुम्हारे आराम काल में

ज़ाकिर अली ‘रजनीश’ said...

जबरदस्त।
--------
पड़ोसी की गई क्या?
गूगल आपका एकाउंट डिसेबल कर दे तो आप क्या करोगे?

महफूज़ अली said...

Very good....

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