Friday, April 23, 2010

बेजुबान हूँ कुछ कहूँगा तो लोग कहेंगे कि कहता है इसलिये चुप रहूँगा

बेजुबान हूँ

कुछ कहूँगा तो लोग कहेंगे कि कहता है

इसलिये चुप रहूँगा

image

 

एक अनुमान लगाईए आखिर ऐसा क्या लदा होगा कि इस बेजुबान को अधर में लटकना पड़ा ------------

15 comments:

दिलीप said...

samajh nahi aaya chitra pe hansu...ya aapke bhavon pe soch me padun...bahut sundar bhav...

संगीता पुरी said...

जो भी लदा हो .. झेलना तो बेजुबान को ही पडेगा !!

Mahfooz Ali said...

सारे ब्लौगर डब्बे में बंद हो कर .... देश बदर कर के जन्गल में भेजे जा रहे होंगे.... बहुत बवाल मचाये हुए हैं आजकल सब.... जानबूझ कर खच्चर गाडी में भेजे जा रहे होंगे....

ललित शर्मा said...

@महफ़ूज अली

बिलकुल सही पहचाना गुरु

M VERMA said...

@ Mahfooz Ali
@ Lalit jee
कब जा रहे थे आप लोग मुझे अकेला छोडकर

पवन *चंदन* said...

बहुत खूब
रोचक भी और
विचारणीय भी

Kulwant Happy said...

शब्द तो बोलते ही हैं, यहाँ तो जनाब तस्वीर भी बोलती है। वो बेजुबान नहीं, बस हम बहरे हैं, जुबान तो खुद ने उसे दी है, लेकिन हमारे कानों को उसकी बोली समझ कहाँ आती है, हमें तो मानव बोली भी समझ में कम ही आती है।

मो सम कौन ? said...

वर्मा जी, गाड़ी में लदा है हम इंसानों का लोभ, निष्ठुरता, बर्बरता, हैवानियत।

Udan Tashtari said...

डब्बे में क्या है..फिर भी उसी की चिन्ता..बेचारा घोड़ा!!

Razia said...

पहले उसे नीचे उतारा जाये तब तो कुछ कहा जा सकता है

Jyoti said...

हमे लगता है स्वार्थ ओर लालच...........

पी.सी.गोदियाल said...

बेचारे कागज़ के बेजुबां डब्बे, इस गधे ने सब पलट दिए, कामचोर कहीं का !

ajit gupta said...

महफूज की बात में दम है। वैसे मेरा मानना है कि घोड़े बिदकाने के लिए सारे क्‍या बस एक ही काफी है।

दीपक 'मशाल' said...

bejubaan ki peeda kab samjhenge log?

विवेक सिंह said...

ओह ! मन दुखी हो गया ।

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