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Saturday, June 13, 2026

प्रजा चुप क्यो थी?!

विक्रम के कंधों पर लदे वेताल ने एक कथा सुनाई—

एक नगर में एक राजा था। उसके राज्य में अपराधियों को संरक्षण प्राप्त था, स्त्रियाँ असुरक्षित थीं, भूख से लोग मर रहे थे और न्याय दम तोड़ चुका था। जब स्त्रियों को सरेआम निर्वस्त्र कर अपमानित किया जाता या अन्य जवाबदेही से बचकर राजा चुप्पी का दामन थाम लेता। आमतौर पर वह उसी समय किसी मंदिर में भव्य अनुष्ठानों का आयोजन कर धर्मरक्षक होने का स्वांग रचता।

वेताल ने पूछा—
"राजन, इतना अन्याय होने पर भी प्रजा राजा के विरुद्ध मौन क्यों थी?"

विक्रम ने वेताल के कान में उत्तर दिया—
"क्योंकि उस राज्य में धर्म, करुणा और न्याय का मार्ग न रहकर प्रदर्शन और पाखंड का उपकरण बन चुका था। लोगों को प्रश्न पूछने के बजाय जयकार करना सिखा दिया गया था।"

उत्तर सुनते ही वेताल ठहाका लगाकर फिर उसी पेड़ से जा लटका।

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