सुनिये मेरी आवाज में कविता 'हमारी सुरक्षा व्यवस्था तो चाक-चौबन्द है'
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आज अपनी एक व्यंग्य कविता आपको सुना रहा हूँ. कविता का शीर्षक है :
और यह मेरी तलवार जो सिरहाने रखकर सोया था .................