हास्य, व्यंग्य, कही-अनकही
धरा को तुम एक दरख़्त दो
दरख़्त तुम्हें विस्तृत धरा देगा
मृदु एहसास देगा, विश्वास देगा
आशियाना तुमको ये हरा देगा