रामलीला ग्राउंड में
अवशेष देख आया।
यक़ीनन,
रावण मारा गया।
प्रश्न यह नहीं
कि किसने मारा
और क्यों?
शायद अब नहीं जलेगा
मणिपुर,
शायद अब नहीं लुटेगी
नाबालिगों की अस्मत।
शायद बंदूको से अब
आग नहीं
फूल बरसेंगे
शायद ....
शायद ....
बस,
निश्चिंत हो जाइए
कि वह अब
सिर नहीं उठाएगा।
और अगर
वह
फिर अस्तित्व में आ भी गया—
तो क्या हुआ!
अगले साल
फिर मारेंगे।



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