पीकर भी जो लड़खड़ाए नहीं, तो क्या पिया,
कभी झूमे, कभी बल खाए नहीं, तो
क्या पिया।
नशे का बयान — "गड्डी तेरा भाई चलाएगा",
ज़िद में ये बात दुहराए नहीं, तो क्या पिया।
दोस्तों ने जब समझाया — "अब घर चलो",
'शट-अप' चिल्लाए भी नहीं, तो
क्या पिया।
सुबह उठकर कसम खाई — "अब बस, तौबा!",
शाम ढले जाम उठाए नहीं, तो क्या पिया।
माना नाक टूटी है दीवार से, बेलन से नहीं,
घर का पता भूल पाए नहीं, तो क्या पिया।
'लिटिल'
और 'लवली' कह-कहकर
भी जो,
बोतल पूरी गटक पाए नहीं, तो क्या पिया।
चखना न मिला, बोटी भी हुई नसीब नहीं,
नमक से काम चलाए नहीं, तो
क्या पिया।
पीने से याददाश्त बढ़ती होगी अगर कहीं,
'वर्मा' का उधार चुकाए नहीं, तो
क्या पिया।


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