Thursday, June 2, 2011

यह मेरे नाक का सवाल है ..

यह मेरे नाक का सवाल है ..अक्सर यह जुमला मुझे परेशान करता रहा है. आखिर नाक का वह सवाल है क्या? क्या नाक सवाल भी करता है? और अगर करता है तो सवालों से लगातार घिरे होने के बावजूद नाक के सवाल के प्रति हम इतने सचेत क्यों रहते हैं? वैसे जहाँ तक मैं जानता हूँ उसके अनुसार, “नाक रीढ़धारी प्राणियों में पाया जाने वाला छिद्र है। इससे हवा शरीर में प्रवेश करती है जिसका उपयोग श्वसन क्रिया में होता है। नाक द्वारा सूँघकर किसी वस्तु की सुगंध को ज्ञात किया जा सकता है।

वैसे तो नाक आँखो के मध्य स्थित होता है, पर यह सर्वदा आँखों से ओझल ही होता है. इसीलिये इसकी ऊँचाई और सलामती की खबर दूसरे ही रखते हैं. बिना नाक वाला भी हमेशा दूसरों की निगाह में स्वयं को नाक वाला साबित करने के प्रयत्न में लगा रहता है. क्योकि नाक मानव शरीर में सबसे ऊँचा स्थल होता है (यदि स्थितियाँ सामान्य हों तो) अत: इसके क्षतिग्रस्त होने की; कटने की सम्भावना सर्वदा बरकरार रहती है. यूँ तो मक्खियों के लिये यह प्रिय स्थल है पर लोग नाक पर मक्खियों का बैठना बिलकुल पसन्द नहीं करते हैं.

यूँ तो नाक कई प्रकार के होते हैं, पर ऊँची नाक वालों की नाक सबसे नाजुक होती है. इसके कटने की सम्भावना बनी रहती है, फिर भी लोग नाक ऊँची रखना ही पसन्द करते हैं. नाक ऊँची रखने का शौक मानव सभ्यता में बहुत प्राचीन है. रामायण, महाभारत से लेकर अन्य अनेक महायुद्धों का सम्बन्ध इसी नाक से है. नाक की सलामती का यह शौक विकृति के चरम तक पहुँच चुका है. तथाकथित आनरका सम्बन्ध नाक से ही है जिसके कारण मानव सभ्यता (!!) को आनर कीलिंगतक का सफर करना पड़ता है.

सौन्दर्य का आकलन भी नाक से ही प्रारम्भ होता है। नाक-नक्शदेखकर ही लोग रिश्ते बनाते हैं, फब्तियाँ कसते हैं या छेड़ने तक का दुस्साहस कर जाते हैं। छेड़ने की प्रक्रिया में छिड़ेऔर छेड़ेदोनों की नाक को खतरा पैदा हो जाता है और इसके कटने की सम्भावना बन जाती है।

और जहाँ नाक को कटने से बचाने की इतनी जद्दोजहद हो, वहाँ नकेल का आना लाज़मी है। नाक का सीधा सम्बन्ध नकेल से है। इसकी ख़ासियत है कि इसके एक सिरे का सम्बन्ध तो नाक से होता है पर दूसरे सिरे का नियंत्रण किसी और के हाथ में होता है। विडंबना देखिए, अपनी नाक ऊँची रखने का दावा करने वाला आम इंसान अपनी नकेल व्यवस्था, बाज़ार या रूढ़ियों के हाथ में सौंपे बैठा है, और मज़ेदार बात यह है कि उसे इस बात का एहसास भी नहीं है।

आप सबकी नाक सलामत रहे। आपने इस आलेख को पढ़कर मेरी नाक रख ली। धन्यवाद!

12 comments:

Shah Nawaz said...

:-) यह नाक का सवाल है!!!

अरुण चन्द्र रॉय said...

badhiya vyangya !

रश्मि प्रभा... said...

rakhi n naak .... hahaha , hum sabki naak salamat rahe

Sunil Kumar said...

आख़िर आपकी नाक का सवाल है आपने तो सभी ब्लागर की नाक रख ली सुंदर आलेख से , बधाई

Patali-The-Village said...

बहुत सुन्दर व्यंग| धन्यवाद|

संगीता स्वरुप ( गीत ) said...

नाक का सवाल था ...रखनी ही थी .. :):)

Chinmayee said...

हा हा हा बहुत सुन्दर व्यंग ...

आभार
तृप्ती

संजय भास्‍कर said...

बहुत सुन्दर सवाल है!

Sunil Deepak said...

वर्मा जी, आपने नाक के चारों ओर इतनी नाकाबँदी की कि उससे सम्बँधित सभी बात कहने के तरीकों को पकड़ लिया, इससे आप की वैज्ञानिकी विषय की पढ़ायी का अन्दाज़ भी मिलता है. :)

कविता रावत said...

sach is naak ke peeche kya-kya nahi ho jaata..
bahut badiya vyang...

Admin said...

हाहाहा, यह आलेख सच में मजेदार और सोचने पर मजबूर करने वाला है। अच्छा लगता है जब आप अपने लेख में नाक को सिर्फ शरीर का अंग नहीं बल्कि जीवन और सभ्यता से जोड़कर पेश करते है। नाक की नाजुकता, ऊँचाई, सौंदर्य और यहां तक कि ‘नाक की सलामती’ तक की बातें हँसाते और सोचने पर मजबूर करती हैं।

Digvijay Agrawal said...

यह मेरे नाक का सवाल है
वंदन

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