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Friday, July 24, 2026

अभी नाइट है!

इश्क आसान नहीं भाईबहुत फाइट है,

माशूका राज़ी हो गई तो बाप टाइट है।

 

जोड़ी जमेगी कैसे तुम्हारी और उसकी,

चार फुटे तुमछह फुट उसकी हाइट है।

 

उसने पेंच किसी और से लड़ा लिया है,

उड़ता रह गया तुम्हारा अपना काइट है।

 

फुर्र होने की फिराक़ में है वो शायद,

ठीक सात बजे उसकी तो फ्लाइट है।

 

तुम्हें मुबारक हो तुम्हारे सतरंगी सपने,

अपनी किस्मत तो ब्लैक एंड व्हाईट है।

 

माना ये पेड़ इमली का हैआम का नहीं,

उसने कह दिया आमतो वही राइट है।

 

'वर्माने दिन में जला दिए सारे बल्ब,

उसने कह दिया जो—"अभी नाइट है!"


Monday, May 21, 2012

पीकर बेचारा किसी नाले में पड़ा होगा ….



शाम हो चुकी है भला कैसे खड़ा होगा
पीकर बेचारा किसी नाले में पड़ा होगा
.
उसकी मुस्कुराहट कर रही है चुगली
शादीशुदा नहीं शर्तियाँ वह 'छड़ा' होगा
.
आज फिर उसका चेहरा सूजा हुआ है
किसी ‘नाजनीन’ ने थप्पड़ जड़ा होगा
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नाक कट गयी है, आँख कहीं और होगा
किसी बिजली के खम्भे से लड़ा होगा
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‘तौहीन’ इसके लिए शान -ओ-शौकत है
इसके जेहन में शायद चिकना घड़ा होगा

Monday, April 30, 2012

तुम्हारी आशिकी शक के दायरे में है …


पीये और पिलाए नहीं तो क्या किया?
पीकर भी जो लड़खडाए नहीं, तो क्या किया?
.
तुम्हारी आशिकी शक के दायरे में है
नाज़नीन से पिटकर आये नहीं, तो क्या किया?
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शादीशुदा के लिए तो तोहफा है बेलन
बीबी से आजतक खाए नहीं, तो क्या किया?
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सियासत का दंभ भरते हो, कच्चे हो पर
घोटालों के लिस्ट में आये नहीं, तो क्या किया?
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माना उठ गयी थी महफ़िल जहां गए थे
और किसी बारात में खाए नहीं, तो क्या किया?
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कोई और क्यों न उठा लेगा अमानत
बुलाने पर भी तुम आये नहीं, तो क्या किया?
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माशूका मिली किसी और के पहलू में
फिर भी तुम तिलमिलाए नहीं, तो क्या किया?
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माना कि तुमने स्वर साधना नहीं किया
बाथरूम में भी जो गाये नहीं, तो क्या किया?
.
नफ़रत है तुम्हें नहाने से जगजाहिर है
शादी के दिन भी नहाये नहीं, तो क्या किया?

Monday, April 26, 2010

दाँत नहीं पर नोचे बोटी ~~

image

लगता है फिट हो गई गोटी, वाह भई वाह

सांझ ढले अंगूर की बेटी, वाह भई वाह

.

मुर्ग मुसल्लम की दावत खाने दौड़े आये

दाँत नहीं पर नोचे बोटी, वाह भई वाह

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पानी-पानी चिल्लाते हो प्यासे अधरों से

देखो खुला छोड़ दिया टोटी, वाह भई वाह

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कल दिखे गुलछर्रे उड़ाते कनाट प्लेस में

कहते हो किस्मत है खोटी, वाह भई वाह

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अब क्यों माँगते सीढ़ी, किसके कहने पर

चढ़ गये तुम ऊँची चोटी, वाह भई वाह

.

सौन्दर्य प्रतियोगिता में आये हैं देखो तो

एक आँख बड़ी दूजी छोटी, वाह भई वाह

.

सौदागर सपनों के तुम अपनों के खातिर

छीन ली गरीब की रोटी, वाह भई वाह

Wednesday, August 12, 2009

दिल बहलता नहीं तो मै क्या करूँ ~

~~~~
कसरत करके डोले बना लीजिए
सुबह-शाम नाश्ते में चना लीजिए
*
पेट के मरीज़ो सुनो मेरी बात
सुबह-सुबह पानी गुनगुना लीजिए

*
खून की कमी है आपके शरीर में
आप तो
महुए का तना लीजिए
*
मधुमेह या रक्तचाप है तो भाई
खाने में अपने
सहजना लीजिए
*
दिल बहलता नहीं तो मै क्या करूँ
आप अपने लिये झुनझुना लीजिए

*
बोल्ड / इटालिक पर चटका लगाकर देखें

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विश्व रेडक्रास दिवस पर कविता पाठ 7 मई 2010

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