एक बार घोड़ों की रेस हो रही थी। न जाने कैसे, एक प्रभावशाली
व्यक्तित्व वाला महत्वाकांक्षी गधा भी उसमें शामिल हो गया।
लोग हैरान थे— "भला गधा घोड़ों से कैसे जीत
पाएगा?"
रेस शुरू हुई और कुछ देर
बाद समाप्त भी हो गई।
नतीजा आया तो सबकी आँखें फटी की फटी रह गईं। सबसे आगे
गधा था।
लोगों ने उत्सुकता से पूछा, "इतने तेज़-तर्रार घोड़ों के बीच तुम
जीत कैसे गए?"
गधा मुस्कुराया और बोला—
"मैंने बस इतना कहा था—
'तुम सब मेरे पीछे-पीछे चलो, मैं तुम्हें गंतव्य तक
पहुँचने का
शॉर्टकट रास्ता बताता हूँ।'
बस... वे मेरे पीछे चल पड़े, चलते रहे और मैं जीत गया।"

घोड़े भला गधे को फोलो क्यों करने लगे?
ReplyDeleteये हो सकता है गधे का व्यक्तित्व प्रभावशाली रहा होगा पर घोड़ों को भी सोचना चाहिए था है तो गधा ही न।
पता नहीं हम क्या-क्या लिख रहे।
सारगर्भित रोचक लघुकथा है सर।
सादर
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जी नमस्ते,
आपकी लिखी रचना शुक्रवार ७ अगस्त २०२६ के लिए साझा की गयी है
पांच लिंकों का आनंद पर...
आप भी सादर आमंत्रित हैं।
सादर
धन्यवाद।
आपके द्वारा इंगित संकेतानुसार आवश्यक संशोधन कर दिया है
Deleteशुक्रिया
गदहा भी गधा हो सकता है
ReplyDeleteवंदन
जी हाँ
Deleteशुक्रिया
वाह :)
ReplyDeleteशुक्रिया
Deleteजो गधे के पीछे जा सकते हैं वे तो गधे से भी बड़े गधे सिद्ध हो गये
ReplyDeleteयकीनन
Deleteऔर यही हो रहा है