Wednesday, June 17, 2026

चोर के घर चोरी

 

एक बार चोर तिजोरीलाल अपने प्रतिष्ठित रात्रिकालीन कार्य पर निकला। उसका निशाना थासेठ सुखविंदर का घर। पूरी पड़ताल के बाद उसे यह विश्वास हो चुका था कि सेठ अपने परिवार सहित कुछ दिनों के लिए शहर से बाहर गया हुआ है।

तिजोरीलाल ने पूरे इत्मीनान से अपना काम अंजाम दिया। ताले खुले, अलमारियाँ टटोली गईं, तिजोरियाँ हल्की हुईं। इस श्रमसाध्य प्रक्रिया में उसे लगभग तीन घंटे लगे। संतुष्ट मन से वह अपनी बरसों की साधना का फल समेटे घर लौटा।

लेकिन घर पहुँचते ही उसके पैरों तले ज़मीन खिसक गई।

उसके अपने घर का ताला टूटा हुआ था। भीतर जाकर देखा तो उसकी बरसों की कमाई पर कोई और हाथ साफ कर चुका था।

चोर के घर चोरी!

यह तो सरासर नाइंसाफी थी।

क्षणभर के लिए उसके मन में पुलिस को फ़ोन करने का विचार आया, मगर उसने तुरंत उसे दबा दिया। पुलिस में शिकायत दर्ज कराने के लिए चोरी गए सामानों की सूची देनी पड़ती, और सूची देते ही उसकी अपनी प्रतिष्ठा, व्यवसाय और स्वतंत्रतातीनों संकट में पड़ जाते।

काफ़ी विचार-विमर्श के बाद उसने सबसे सुरक्षित और लोकतांत्रिक रास्ता चुना।

उसने इस गंभीर घटना की सूचना चोर एसोसिएशन को दे दी।

एसोसिएशन के पदाधिकारियो में वह चोर भी था जिसने इस घटना को अंजाम दिया था. उसी की सलाह पर एक गोपनीय चांच कमेटी बनाई गई जिसका अध्यक्ष वह खुद बन गया.

सुनते हैं जांच जारी है

10 comments:

Razia Kazmi said...

समझदार के लिये इशारा काफ़ी है

Aman Peace said...

👍

M VERMA said...

😃 😊

M VERMA said...

Thanks 😊

हरीश कुमार said...

बेहतरीन

Onkar Singh 'Vivek' said...

क्या कहने

Anita said...

कैसी विडंबना है यह

M VERMA said...

Thanks

M VERMA said...

Thanks 😊

M VERMA said...

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