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Monday, July 13, 2026

आपदा में अवसर

राष्ट्र के समस्त सलाहकारों को निर्देश दिया गया था— "आपदा में अवसर खोजो।"

लक्ष्य स्पष्ट था— उसे वोट में बदलना।

लंबे मंथन और गंभीर विमर्श के बाद सर्वसम्मति से एक योजना बनी—

"जब भी कोई महामारी फैले, जनता को ऐसी वैक्सीन दी जाए जो शरीर से अधिक दिमाग पर असर करे; जो प्रतिरोधक क्षमता नहीं, बल्कि धार्मिक वैमनस्य, अंधविश्वास और मूढ़ता बढ़ाए।"

योजना लागू हुई।

महामारी आई।

वैक्सीन के नाम पर सोशल मीडिया के माध्यम से नारों, अफ़वाहों और नफ़रत की एक स्मार्ट वैक्सीन बाँटी गई।

कुछ लोग बीमारी से मर गए, कुछ लोग डर के साथ जीने लगे और कुछ लोग सोचने की क्षमता खो बैठे।

फिर चुनाव हुए।

महामारी समाप्त हो गई, लेकिन घोषणा की गई कि खतरा अभी बाकी है। नए-नए आँकड़ों, संदेशों और प्रचार के सहारे
भय का वातावरण बनाए रखा गया।

और इसीलिए स्मार्ट वैक्सीन का वितरण जारी रहा—

जिसका असर आज भी कायम है,
और जो हर दिन
समाज को नए सिरे से संक्रमित कर रही है।

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