1. जिस तरह परिवहन विभाग वाहन में ज़रा-सी
अनियमितता पर चालान ठोक देता है, उसी तरह अब वाहन मालिक भी सड़क की बदहाली पर सरकार का चालान काट सकेंगे—
गड्ढा गहरा होगा तो जुर्माना दोगुना।
2. जिस प्रकार सरकारी कर्मचारी चुनावी सभाओं में
शामिल नहीं हो सकते, उसी
प्रकार अब मंत्री
भी चुनाव प्रचार से वंचित रहेंगे, क्योंकि
जनता ने उन्हें पोस्टर
चिपकाने के लिए नहीं, काम करने के लिए चुना है।
3. सरकारी वाहन का प्रयोग अब केवल सरकारी कार्यों
के लिए होगा—
सब्ज़ी, तरकारी, दूध,
और रिश्तेदारों की बारात ढोने के लिए नहीं।
4. शिलान्यास पट्टिकाओं की संख्या कार्य की
गुणवत्ता से जोड़ी जाएगी—
काम न हुआ तो
पट्टिका भी नहीं,और
दोबारा फीता काटने पर फीता काटने वाले का वेतन कटेगा।
5. हर वादे के साथ डिलीवरी डेट अनिवार्य
होगी—
तारीख़ निकलने पर वादा
अपने आप “जुमला”
घोषित मान लिया
जाएगा।
सूत्रों के अनुसार यह विधेयक जनता के सपनों में सर्वसम्मति से
पारित हुआ है। जागने पर इसके लागू
होने की संभावना न के बराबर ज्यों-की-त्यों बनी हुई है।
शेष अगले अंक में क्रमश:





6 comments:
Wah!
सुन्दर पोस्ट
Thanks 😊
Thanks 😊
बेहतर पेशकश है. हमें जनता की इच्छाएँ, प्रतिक्रियाएँ और सपने सचाई के साथ सार्वजनिक रूप से बयाँ करने चाहिए.
Thanks 😊
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