Sunday, May 13, 2012

जो नंगा है , वही चंगा है .....

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(वैधानिक चेतावनी : यहाँ शारीरिक नंगई को कोई स्थान नहीं है)

नंगा होने का सुख नंगा ही जान पायेगा. वस्तुत: नंगई एक नैसर्गिक गुण है जो अर्जित भी की जा सकती है और विरासत में भी मिल सकती है. नंगई के लिए आवश्यक संसाधन है माँ-बहन की गालियाँ. यह भी साधना से अर्जित की जाती है. वैसे भी आजकल के सीरियलों और तथाकथित ‘रियलिटी शोज’ में यह बखूबी प्रयोग की जाती है और वहाँ से भी अर्जित की जा सकती है.

समाज के कुछ क्षेत्र ऐसे हैं जिनमें यह अतिआवश्यक गुण की श्रेणी में आते हैं, उनमें से कुछ प्रमुख हैं : राजनीति, ठेकेदारी, भाईगिरी, उठाईगिरी आदि. प्रथम दो क्षेत्रों (राजनीति, ठेकेदारी) में यह थोड़े परिमार्जित रूप में परिलक्षित होती है पर अन्य दो क्षेत्रों (भाईगिरी, उठाईगिरी) में यह अपने नैसर्गिक रूप में ही कारगर है.

यहाँ बाथरूम या हरम में नंगे को नंगई के रूप में नहीं देख सकते. क्योंकि ऐसा करने से शायद ही कोई नंगई के इलज़ाम से बच पाये. यहाँ की चर्चा में केवल सार्वजनिक रूप से नंगे ही शामिल हैं. सार्वजनिक नंगई में लिप्त आमतौर पर वैयक्तिक नंगई से परे भी होते हैं.

नंगई को साध चुके समाज के हर क्षेत्र में अपने कार्य संपादन में इसका चतुराई से प्रयोग करते हैं. कई तो नंगई से अपने कार्य को संपन्न करवाने के उपरांत नंगई के खिलाफ प्रवचन देते दिख सकते हैं, जैसा आमतौर पर राजनीति में देखा जा सकता है.

नंगई का असली स्वरूप इस उदाहरण से स्पष्ट हो सकता है :

दृश्य : परीक्षास्थल (काल्पनिक)

आब्जरवर ने सामूहिक नकल पकड़ लिया और सेंटर के खिलाफ पत्र तैयार कर ही रहा है कि तभी एक लड़की (प्रायोजित) आब्जरवर के खिलाफ नक़ल चेकिंग के दौरान अनावश्यक रूप से स्पर्श, यानी छेडछाड का आरोप लगाने वाला पत्र लेकर आ गयी’

निष्कर्ष : आब्जरवर भी वही है, कोई शिकायत भी नहीं हुई, सभी सानन्द हैं और नक़ल जारी है.

मेरे एक मित्र का पुत्र (मात्र ४ वर्षीय) नैसर्गिक रूप से अर्जित किये हुए गुण का बखूबी प्रदर्शन किया. जब वे बाजार में थे तो उनका पुत्र एक खिलौने की जिद कर बैठा और मना करने पर वहीं नंगा हो गया. मजबूरन वह खिलौना उन्हें खरीदना ही पड़ा.

अस्तु, ये उदाहरण साबित करने को पर्याप्त हैं कि नंगई एक सात्विक ही नहीं कारगर गुण है.

कहना ही पडेगा “जो नंगा है,  वही चंगा है”

8 comments:

डॉ टी एस दराल said...

सही कहा । कारगर गुण तो है ।

मुकेश पाण्डेय चन्दन said...

nango se to khuda bhi darta hai !

रविकर फैजाबादी said...

रविकर चर्चा मंच पर, गाफिल भटकत जाय |
विदुषी किंवा विदुष गण, कोई तो समझाय ||

सोमवारीय चर्चा मंच / गाफिल का स्थानापन्न

charchamanch.blogspot.in

डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री मयंक (उच्चारण) said...

माँ को नमन!
मातृदिवस की शुभकामनाएँ!

udaya veer singh said...

तात्पर्यतः नंगा होना सर्वगुणकारी है ,शायद इसीलिए .....सड़क ,सभा, सदन और शरीर नंगे हो रहे हैं .... शुक्रिया जी /

Rajesh Kumari said...

ye bhi ek hathkanda hai !!!sahi likha hai but chitr bahut hi pyaara hai.ise
nangai bilkul nahi kah sakte..jab ki nanga hai ..

veerubhai said...

NANG BDE PARMESHVAR SE .NANG ARE THE

HIGHCOMMAND.

Kailash Sharma said...

नंगों से सभी डरते हैं....सार्थक प्रस्तुति...

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