Friday, May 14, 2010

ढिंढोरापीटू साफ़्टवेयर

प्राचीनकाल से ही ढिंढोरा पीटने की आवश्यकता पड़ती रही है. मुगलकाल में इसका उत्कर्ष हुआ. इसका अन्य नाम मुनादी है. पहले यह राजा-महराजाओं तक ही सीमित था, वे ही ढिंढोरा पिटवाते थे. यह तो सामान्य सी बात है कि यदि किसी को पिटवाया जायेगा तो कोई न कोई पिटेगा ही. पीटने और पिटने में सामान्य जनता का कोई सानी नहीं रहा है. पहले ढिंढोरा नगाड़े टाईप के वाद्य का सहारा लेकर पीटा जाता था. अब स्वरूप बदल गया है. बदले हुए स्वरूप की अगर चर्चा करें तो अब यह विविध रूपों में दृष्टिगोचर है. प्राचीन स्वरूप बिल्कुल बदल गया है.

मीडिया के अधिकांश संसाधन ढिंढोरापीटू ही तो हैं. कब किसका उत्कर्ष कर दें और कब अपकर्ष कर दें पता ही नहीं है. अब ढिंढोरा पीटने के लिये ढिंढोरा की जरूरत नहीं रही. अब तो कुछ लोग, संस्था या संस्थान इस काम को बखूबी अंजाम दे रहे हैं. बाकायदा इसके लिये बजट निर्धारित होता है. अगर आपको भी किसी बात का ढिंढोरा पिटवाने को सोच रहे हैं तो यह विकल्प महंगा साबित होगा.

ब्लागजगत में कुछ ढिंढोरापीटू गिरोह सक्रिय है (मुझे लगता है, आपको लगे न लगे). वैसे भी आवश्यकता भी है. आवश्यकता आविष्कार की जननी है (बुजुर्ग बताते है). मैनें इसी आवश्यकता के मद्देनजर एक तरीका इजाद किया है ताकि बिना कुछ खर्च किये आप सभी (मर्जी आपकी) आवश्यकता पड़ने पर ढिंढोरा पिटवा/पीट सकें. साफ्टवेयर ईजाद की प्रक्रिया जारी है. जल्द ही बिक्री के लिये उपलब्ध होगा. यह कुछ 'बज' जैसा होगा और जब आप कोई पोस्ट ठेलेंगे तो यह हरेक के कम्प्यूटर पर अपने आप खुल जायेगा. (सयाने लोग जिसे हैकिंग कहते है कुछ उस तरह के प्रभाव वाला, पर यह हैकिंग नहीं होगा) इस प्रक्रिया को कानूनी मान्यता भी मिले इसके लिये वार्ता प्रगति पर है.

इस साफ्टवेयर की आकृति और प्रक्रिया का अन्दाजा निम्न चित्र से आसानी से लग सकता है :

प्रतिक्रिया दें और आर्डर बुक करवायें.

7 comments:

sangeeta swarup said...

:):) ,

बढ़िया है....वैसे मुझे कोई आवश्यकता नहीं है....

इसलिए कोई बुकिंग नहीं...

पं.डी.के.शर्मा"वत्स" said...

ब्लाग चुनावों में आपके इस साफ्टवेयर की बहुत भारी मॉग निकलने वाली है...

माधव said...

nice

विनोद कुमार पांडेय said...

आज कल इस सॉफ़्टवेयर की बहुत ज़रूरत हो गई है..डिमांड बहुत बढ़ गई है....बढ़िया रचना

ललित शर्मा said...

बहुत कारगर साफ़्टवेयर बनाया है वर्मा जी,
इसकी जानकारी तो हमें अभी लगी,हमारे कुछ मित्र लोग ब्लाग सरपंच के चुनाव में भाग ले रहे हैं।
इसलिए आवश्य्कता पड़ सकती है।

हमारे लिए बुकिंग कर लिजिए,एडवांस बुकिग की राशि फ़ैक्स द्वारा भेज दी गयी है।
बाकी इस्तेमाल करने बाद भेज दी जाएगी

Yugal Mehra said...

हमारे लिए भी एक बुक कर दीजिये

'अदा' said...

are waah..!!
hamra to kaam ban gaya..
ham bhi ummeedwaar hun...
software bookiye hamra khatir bhi...

विश्व रेडक्रास दिवस

विश्व रेडक्रास दिवस
विश्व रेडक्रास दिवस पर कविता पाठ 7 मई 2010

हिन्दी दिवस : काव्य पाठ

हिन्दी दिवस : काव्य पाठ
हिन्दी दिवस 2009

राजस्थान पत्रिका में 'यूरेका'

राजस्थान पत्रिका में 'यूरेका'

हमारी वाणी

www.hamarivani.com

ब्लागोदय


CG Blog

एग्रीगेटर्स

आपका पता

विजेट आपके ब्लॉग पर

ब्लागर परिवार

Blog parivaar

लालित्य

ग्लोबल भोजपुरी