Thursday, October 22, 2026

रावण मारा गया

 

रामलीला ग्राउंड में
अवशेष देख आया।

यक़ीनन,
रावण मारा गया।

प्रश्न यह नहीं
कि किसने मारा
और क्यों?

शायद अब नहीं जलेगा
मणिपुर,
शायद अब नहीं लुटेगी
नाबालिगों की अस्मत।

शायद बंदूको से अब

आग नहीं

फूल बरसेंगे

शायद ....

शायद ....

बस,
निश्चिंत हो जाइए
कि वह अब
सिर नहीं उठाएगा।

और अगर
वह
फिर अस्तित्व में आ भी गया—
तो क्या हुआ!

अगले साल
फिर मारेंगे।

2 comments:

  1. आपकी कविता का संदेश है कि केवल वार्षिक प्रतीकात्मक उत्सवों (पुतला दहन) से समाज सुधार नहीं हो सकता; जब तक वास्तविक जीवन में पनप रही बुराइयों का अंत नहीं होगा, तब तक रावण-वध केवल एक औपचारिकता बना रहेगा।
    सादर
    -----
    जी नमस्ते,
    आपकी लिखी रचना शुक्रवार २३ अक्टूबर २०२६ के लिए साझा की गयी है
    पांच लिंकों का आनंद पर...
    आप भी सादर आमंत्रित हैं।
    सादर
    धन्यवाद।

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  2. आपकी कविता का संदेश है कि केवल वार्षिक प्रतीकात्मक उत्सवों (पुतला दहन) से समाज सुधार नहीं हो सकता; जब तक वास्तविक जीवन में पनप रही बुराइयों का अंत नहीं होगा, तब तक रावण-वध केवल एक औपचारिकता बना रहेगा।
    सादर
    -----
    जी नमस्ते,
    आपकी लिखी रचना शुक्रवार २३ अक्टूबर २०२६ के लिए साझा की गयी है
    पांच लिंकों का आनंद पर...
    आप भी सादर आमंत्रित हैं।
    सादर
    धन्यवाद।

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