Sunday, July 5, 2026

जांच समिति का झुनझुना (लघुकथा)

एक राजा ने एक भव्य इमारत बनवाने का निर्णय लिया। विज्ञापन निकले। नामी निर्माणकर्ताओं ने आवेदन किया, पर ठेका कुछ मशहूर चोरों को मिला। निर्णय स्वयं राजा ने लिया।

राजा ने चोरों को अलग बुलाकर कहा
मैं जानता हूँ तुम चोर हो। इसलिए ही चुना है। इमारत ऐसी बननी चाहिए कि लोग उसकी तारीफ करें, और साथ ही चोरी का पूरा इंतज़ाम भी रहे। चोरी तुम करोगे, और उसका बड़ा हिस्सा मेरे निजी ख़ज़ाने में जाएगा।

चोर मुस्कुरा दिए।

कुछ ही दिनों में इमारत बन गईमज़बूत, भव्य, सुरक्षित। भीतर एक गुप्त मार्ग भी था, जिसे केवल चोर जानते थे।

रातें चोरी में बदल गईं। समझौते के अनुसार हिस्सा बंटता रहाऊपर राजा, नीचे चोर। व्यवस्था सफलथी।

फिर एक दिन गुप्त मार्ग खुल गया।

जनता भड़क उठी। सड़कों पर भीड़ उतर आईन्याय, जाँच और दंड की माँग।

राजा मुस्कुराया और बोला
मैं आपकी पीड़ा समझता हूँ। शायद आपको पता नहीं कि इसके लिए मैंने एक जांच समिति बना दी है। जो चोर हैं, उन्हें दंड मिलेगा। और तब तक एक नई इमारत बनाई जाएगीपहले से अधिक भव्य, पहले से अधिक सुरक्षित।

भीड़ एक क्षण को मौन रहीफिर ताली बजाई।
कुछ ही देर में मैदान महाराज की जयसे गूंज उठा।

बहुमत का विरोध समाप्त हो गया, पर कुछ हाथों में उठी तख्तियाँ अब भी स्वीकृति में नहीं झुकी थीं।

और इधर, चोरों ने नई इमारत का नक्शा खोल लिया था
इस बार गुप्त मार्ग पहले से भी अधिक चौड़ा था।

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