हास्य, व्यंग्य, कही-अनकही
हिन्दयुग्म पर मेरी रचना
परहेज़ करना कोई गीत गाने से
क्या वर्मा जी .....यहां तो जिंदा मरी हुई कोई भी चिडिया नज़र नहीं आ रही है ...मगर उसकी आत्मा जरूर भटक रही थी ..माईनस लगा के निकल ली ....हमने एक प्ल्स मारा तो आपका स्कोर अंडा हो गया ..।बाकी बातें बाद में करेंगे ।
कविता भी पढ आया हूं ..हमेशा की तरह एक संवेदनशील कवि के ह्रदय से निकली एक उत्कृष्ट रचना ।
वर्मा जी, कविया बहुत ही ज़बरदस्त है! बहूत ही खूब
हमेशा की तरह लाजवाब....
बहुत बढ़िया सर ....आभार
बहुत मार्मिक चित्रण किया है आपने इस कविता में...
क्या वर्मा जी .....यहां तो जिंदा मरी हुई कोई भी चिडिया नज़र नहीं आ रही है ...मगर उसकी आत्मा जरूर भटक रही थी ..माईनस लगा के निकल ली ....हमने एक प्ल्स मारा तो आपका स्कोर अंडा हो गया ..।बाकी बातें बाद में करेंगे ।
ReplyDeleteकविता भी पढ आया हूं ..हमेशा की तरह एक संवेदनशील कवि के ह्रदय से निकली एक उत्कृष्ट रचना ।
ReplyDeleteवर्मा जी, कविया बहुत ही ज़बरदस्त है! बहूत ही खूब
ReplyDeleteहमेशा की तरह लाजवाब....
ReplyDeleteबहुत बढ़िया सर ....आभार
ReplyDeleteबहुत मार्मिक चित्रण किया है आपने इस कविता में...
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