Tuesday, May 18, 2010

धरा को तुम एक दरख़्त दो~

धरा को तुम एक दरख़्त दो

दरख़्त तुम्हें विस्तृत धरा देगा

मृदु एहसास देगा, विश्वास देगा

आशियाना तुमको ये हरा देगा

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13 comments:

  1. सच्ची बात ...गागर में सागर भरा है आपने.

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  2. सही कहा , अच्छा सन्देश


    http://madhavrai.blogspot.com/

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  3. कहाँ से इतने खूबसूरत चित्र मिले सर मुझे भी बताएं... और आपका मुक्तक तो बस पूछिए ही मत..

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  4. खरी बात....बहुत अच्छा भाव

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  5. बहुत ही उम्दा वर्मा जी ।

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  6. वर्मा साहब बेहतरीन लगी पोस्ट

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  7. kam shabdo me ek pate ki baat kahi...

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  8. बहुत अच्छी लगी यह पोस्ट...

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  9. खूबसूरत चित्र,बहुत अच्छा भाव..शायद अब हम वृक्षारोपण पर ध्यान दें...

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  10. यथार्थबोध के साथ कलात्मक जागरूकता भी स्पष्ट है।

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  11. waah!
    laajawaab tareeka laajawaab baat kehne kaa...

    kunwar ji,

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  12. वैवाहिक वर्षगाँठ पर बधाई सर..

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