Monday, April 30, 2012

तुम्हारी आशिकी शक के दायरे में है …


पीये और पिलाए नहीं तो क्या किया?
पीकर भी जो लड़खडाए नहीं, तो क्या किया?
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तुम्हारी आशिकी शक के दायरे में है
नाज़नीन से पिटकर आये नहीं, तो क्या किया?
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शादीशुदा के लिए तो तोहफा है बेलन
बीबी से आजतक खाए नहीं, तो क्या किया?
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सियासत का दंभ भरते हो, कच्चे हो पर
घोटालों के लिस्ट में आये नहीं, तो क्या किया?
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माना उठ गयी थी महफ़िल जहां गए थे
और किसी बारात में खाए नहीं, तो क्या किया?
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कोई और क्यों न उठा लेगा अमानत
बुलाने पर भी तुम आये नहीं, तो क्या किया?
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माशूका मिली किसी और के पहलू में
फिर भी तुम तिलमिलाए नहीं, तो क्या किया?
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माना कि तुमने स्वर साधना नहीं किया
बाथरूम में भी जो गाये नहीं, तो क्या किया?
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नफ़रत है तुम्हें नहाने से जगजाहिर है
शादी के दिन भी नहाये नहीं, तो क्या किया?

9 comments:

  1. waah ! Great creation ! Loving it.

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  2. वाह वर्मा जी ,गज़ब की तुकबंदी है ।

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  3. माना कि तुमने स्वर साधना नही की,बाथरूम मे भी जो गाये नहीं तो ,क्या किया ?

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  4. बहुत बढ़िया!
    --
    आज चार दिनों बाद नेट पर आना हुआ है। अतः केवल उऊपस्थिति ही दर्ज करा रहा हूँ!

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  5. सियासत का दंभ भरते हो, कच्चे हो पर
    घोटालों के लिस्ट में आये नहीं, तो क्या किया?

    ...siyasat ka asli rang tabhi to dikhta hai..
    bahut badiya sateek samyik rachna..

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  6. आप हर शेर में इतनी शरारत भर देते हो कि इंसान खुद को हसने से रोके ही नहीं पाता। मुझे सबसे ज़्यादा वो शादी वाला और बाथरूम में गाने वाला हिस्सा सबसे मस्त लगा, क्योंकि हम सब किसी न किसी को ऐसे ही चिढ़ाते हैं।

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