पीये और पिलाए नहीं तो क्या किया?
पीकर भी जो लड़खडाए नहीं, तो क्या किया?
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तुम्हारी आशिकी शक के दायरे में है
नाज़नीन से पिटकर आये नहीं, तो क्या किया?
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शादीशुदा के लिए तो तोहफा है बेलन
बीबी से आजतक खाए नहीं, तो क्या किया?
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सियासत का दंभ भरते हो, कच्चे हो पर
घोटालों के लिस्ट में आये नहीं, तो क्या किया?
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माना उठ गयी थी महफ़िल जहां गए थे
और किसी बारात में खाए नहीं, तो क्या किया?
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कोई और क्यों न उठा लेगा अमानत
बुलाने पर भी तुम आये नहीं, तो क्या किया?
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माशूका मिली किसी और के पहलू में
फिर भी तुम तिलमिलाए नहीं, तो क्या किया?
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माना कि तुमने स्वर साधना नहीं किया
बाथरूम में भी जो गाये नहीं, तो क्या किया?
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नफ़रत है तुम्हें नहाने से जगजाहिर है
शादी के दिन भी नहाये नहीं, तो क्या किया?

waah ! Great creation ! Loving it.
ReplyDelete:):) बहुत खूब
ReplyDeleteवाह वर्मा जी ,गज़ब की तुकबंदी है ।
ReplyDeleteमाना कि तुमने स्वर साधना नही की,बाथरूम मे भी जो गाये नहीं तो ,क्या किया ?
ReplyDeleteबहुत बढ़िया!
ReplyDelete--
आज चार दिनों बाद नेट पर आना हुआ है। अतः केवल उऊपस्थिति ही दर्ज करा रहा हूँ!
nice
ReplyDeleteसियासत का दंभ भरते हो, कच्चे हो पर
ReplyDeleteघोटालों के लिस्ट में आये नहीं, तो क्या किया?
...siyasat ka asli rang tabhi to dikhta hai..
bahut badiya sateek samyik rachna..
kamaal ke ghazal
ReplyDeleteआप हर शेर में इतनी शरारत भर देते हो कि इंसान खुद को हसने से रोके ही नहीं पाता। मुझे सबसे ज़्यादा वो शादी वाला और बाथरूम में गाने वाला हिस्सा सबसे मस्त लगा, क्योंकि हम सब किसी न किसी को ऐसे ही चिढ़ाते हैं।
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