आवश्यकता है :
एक रावण की
योग्यता :
मायावी होना,
जो अगले साल -
दशहरा पर्व तक
फिर से खड़ा हो जाये;
जो इस साल के कद से
अगले साल और बड़ा हो जाये;
छल, क्षद्म, अनाचार-व्यभिचार
विशेष योग्यता मानी जायेगी.
हरण-अपहरण में
दक्ष होना आवश्यक है.
उसे खुद पर वार कर सकने योग्य
'राम' की तलाश खुद करनी होगी.
(हम तलाश करने में नाकाम रहे हैं)
यह उसकी विशेष योग्यता होगी,
इच्छुक तुरंत सम्पर्क करें.
अब तक के वारदातों का
बायोडाटा साथ लायें,
पहले आओ-पहले पाओ
का लाभ उठायें.
(नोट : भारतीय नेता कृपया सम्पर्क न करें)

पुतला फूँकत जग मुआ
ReplyDeleteरावण मरा ना कोय
जो फूँके निज अहंकार
रावण क्यूँ पैदा होय।
प्रमोद ताम्बट
भोपाल
www.vyangya.blog.co.in
http://vyangyalok.blogspot.com
व्यंग्य और व्यंग्यलोक
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अब ऐसा नोट लगा दिये हैं तो कहाँ से मिलेगा... :)
ReplyDeleteक्या लिखा है आपने वाह ! बहुत खूब और एकदम सटीक
ReplyDeleteतीव्र कटाक्ष! एक एक शब्द चोट करती हुई-सी!
ReplyDeleteआवश्यकता है : एक रावण की ~~
ReplyDeleteआवश्यकता है :
एक रावण की
योग्यता :
मायावी होना,
जो अगले साल -
दशहरा पर्व तक
फिर से खड़ा हो जाये;
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तभी तो भारत का महान नेता बनेगा प्यारे!
आपकी लेखनी का ज़वाब नहीं..बहुत ही सटीक कटाक्ष ....आभार
ReplyDeleteतीखा कटाक्ष्………………बेहतरीन्।
ReplyDeleteयह तो नहीं मिलता ...
ReplyDeleteरावण तो
ReplyDeleteदुर्बुद्धी का प्रतीक मात्र है |उसे एक दिन में समाप्त नहीं किया जा सकता |सच में रावण गली गली
में हें तलाश तो राम की अति आवश्यक है |बधाई अच्छी पोस्ट के लिए |
आशा
रावण की नियुक्ति करने वाला कोई नेता ही हो सकता है।
ReplyDeleteदोस्त की तरह कहूँ तो, आपने रावण को सिर्फ पौराणिक पात्र नहीं रहने दिया, बल्कि आज के समाज का आईना बना दिया है। हर पंक्ति में तंज है, सवाल है और सच भी है, जो चुभता जरूर है पर झुठलाया नहीं जा सकता।
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