Saturday, June 12, 2010

नेपथ्य में ~ नेपथ्य से बाहर (लघुकथा)

image

नेपथ्य में :

माता के जागरण के लिये कुल चन्दे से आयी रकम : 23900 रूपये

माता के जागरण पर कुल खर्च : 8600 रूपये

बचत (लाभ) : 15300 रूपये

आयोजक नशे में धुत्त, संख्या में कुल तीन. तीनों ने अपने हिस्से का 5100 रूपये लिया और अपना-अपना जाम उठा लिया. 

नेपत्थ्य से बाहर :

जागरण चरमोत्कर्ष पर. माँ का गुणगान जारी :

माता तेरी लीला अपरम्पार

मेरा भी कर दे बेड़ा पार ... 

14 comments:

  1. bahut satik vermaji
    aaj kal kai jagah yahi ho raha hai

    http://sanjaykuamr.blogspot.com/

    ReplyDelete
  2. बहुत बढ़िया...माँ बेडा पार ही तो कर रही थीं....

    धर्म की आड़ में लूट है

    ReplyDelete
  3. सब चंदे का चमत्कार है... कई साल पहले हमारी समिति ने जो लातूर भूकंप पीड़ितों के लिए चंदा जामा किया था कुछ लोग उसमे से भी आधा मार गए था.. सच्चाई जो ऐसे सामने लाये वही लघुकथा..

    ReplyDelete
  4. ये दुनिया ऐसी ही है वर्मा जी सच्चे और अच्छे काम के लिए एक रुपया नहीं निकलेगी लेकिन इनको ढोंगी,पाखंडी और ठग चाहे इनसे लाखों ठग ले इनको वो मंजूर है ,ऐसे माता के जागरण करने वाले हर जगह मिल जायेंगे अब तो ,कुछ तो मजबूरी में ऐसा करते है और कुछ को ऐय्यासी के लिए पैसे चाहिए इसके लिए करते हैं ,क्या कह सकते है इंसानियत मर चुकी है ...
    देते हैं भगवान को धोखा ...
    इन्सान को क्या छोरेंगें ..मन्नाडे साहब वर्षों पहले गा चुकें हैं

    ReplyDelete
  5. सच को उकेरती लघुकथा।

    ReplyDelete
  6. एकदम सटीक सुंदर लघुकथा. धन्य हों.

    ReplyDelete
  7. जबरदस्त वार किया है भाई जी ! हर मोहल्ले की हकीकत बयान कर गयी यह लघु पोस्ट ! शुभकामनायें !!

    ReplyDelete
  8. यही तो होता है धर्म की आड़ में.बहुत तीखा प्रहार.

    ReplyDelete
  9. सटीक और ज़बरदस्त

    ReplyDelete
  10. कॉलेजों में सरस्‍वती जी की पूजा में भी ऐसा ही होता था !!

    ReplyDelete
  11. thode se shabdo me hi ek kadvi sacchayi jise ham jante hain aur fir bhi chup rah jate hai..use shabd de diye aapne.

    ReplyDelete
  12. Bahut dukhdaai prasang...bahut satik vyangya.

    ReplyDelete
  13. सटीक
    तीक्ष्ण

    ReplyDelete