लगता है फिट हो गई गोटी, वाह भई वाह
सांझ ढले अंगूर की बेटी, वाह भई वाह
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मुर्ग मुसल्लम की दावत खाने दौड़े आये
दाँत नहीं पर नोचे बोटी, वाह भई वाह
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पानी-पानी चिल्लाते हो प्यासे अधरों से
देखो खुला छोड़ दिया टोटी, वाह भई वाह
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कल दिखे गुलछर्रे उड़ाते कनाट प्लेस में
कहते हो किस्मत है खोटी, वाह भई वाह
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अब क्यों माँगते सीढ़ी, किसके कहने पर
चढ़ गये तुम ऊँची चोटी, वाह भई वाह
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सौन्दर्य प्रतियोगिता में आये हैं देखो तो
एक आँख बड़ी दूजी छोटी, वाह भई वाह
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सौदागर सपनों के तुम अपनों के खातिर
छीन ली गरीब की रोटी, वाह भई वाह
hmmmmm achhi koshish hai sir..shuru ke do sher achhe lage...
ReplyDeleteसौदागर सपनों के तुम अपनों के खातिर छीन ली गरीब की रोटी, वाह भई वाह
ReplyDeletesacahi byaan kar di verma sahab
सौदागर सपनों के तुम अपनों के खातिर
ReplyDeleteछीन ली गरीब की रोटी, वाह भई वाह
बहुत ही अर्थपूर्ण पंक्तियाँ ! आज के युग की मानसिकता पर चुटीला प्रहार ! आभार !
....वाह भई वाह .... बहुत खूब!!!
ReplyDeleteसौदागर सपनों के तुम अपनों के खातिर
ReplyDeleteछीन ली गरीब की रोटी, वाह भई वाह
बहुत सुन्दर
वाह भई वाह
"पानी-पानी चिल्लाते हो प्यासे अधरों से
ReplyDeleteदेखो खुला छोड़ दिया टोटी, वाह भई वाह"
हमारी तरफ से भी "वाह भई वाह"
कल दिखे गुलछर्रे उड़ाते कनाट प्लेस में
ReplyDeleteकहते हो किस्मत है खोटी, वाह भई वाह
वाह चाचा वाह...बेहतरीन रचना बधाई
सौन्दर्य प्रतियोगिता में आये हैं देखो तो
ReplyDeleteएक आँख बड़ी दूजी छोटी, वाह भई वाह
waah bhai waah....
.सौदागर सपनों के तुम अपनों के खातिर
ReplyDeleteछीन ली गरीब की रोटी, वाह भई वाह
बहुत सुन्दर वर्मा जी। वाह भई वाह।
सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com
सार्थक शीर्षक के साथ.... बहुत अच्छी लगी यह संवेदनशील कविता.....
ReplyDeleteसोये रहे, जब तक लूटा जा रहा था खजाना ,
ReplyDeleteअब कहते है हाथ आ जाए भागते चोर की लंगोटी , वाह भाई वाह !
मज़ा आ गया ...वाकई चेहरे पर मुस्कान आ गयी वर्मा जी !
ReplyDeleteवाह भाई वाह !
वर्मा जी,
ReplyDeleteवाह जी वाह!
वाराणसी का छात्र ही इतना संवेदन शील हो सकता है
ReplyDeleteवाह भई वाह !!!!
www.sahitya.merasamast.com
Vaah ji vaah ...
ReplyDeleteaap ki gazal bahut hi achee hai ... aapke vyang ka jawaab nahi ...
halke shabdon se hi gahree baat kahtee rachna
ReplyDeleteसौन्दर्य प्रतियोगिता में आये हैं देखो तो
ReplyDeleteएक आँख बड़ी दूजी छोटी, वाह भई वाह
यह सौंदर्य भी अलौकिक होगा,दर्शनीय होगा।
उम्दा काव्य के लिए आभार