Friday, June 4, 2010

हम ब्लागर-ब्लागर खेल रहे हैं ~~ (अत्यंत लघुकथा)

..........................................

..........................................

पप्पू तुम क्या कर रहे हो?

जी हम खेल रहे हैं.

फिर यह गालियों की आवाजें क्यों आ रही हैं?

जी हम ब्लागर-ब्लागर खेल रहे हैं.

17 comments:

Shekhar Kumawat said...

ha ha ha

ab blog vani ke mahol se to kuch assa hi lag raha he

honesty project democracy said...

वर्मा जी बच्चे तो बच्चे कुछ महान ब्लोगर भी ब्लॉग-ब्लॉग खेल रहें है ? रोचक प्रस्तुती कास महान ब्लोगर इससे कुछ सीखते और ब्लॉग-ब्लॉग खेलने के बजाय कुछ ऐसा सन्देश अपने ब्लॉग के जरिये देते जो जनहित,जनकल्याण और जनउपयोगी होता !

संजय भास्कर said...

bilkul sach baat........

राजीव तनेजा said...

बहुत ही बढ़िया व्यंग्य

जी.के. अवधिया said...

बहुत ही निराला खेल है भैया ये ब्लोगर ब्लोगर!

sangeeta swarup said...

हा हा हा ..

ज़बरदस्त कटाक्ष

विनोद कुमार पांडेय said...

वर्मा जी बिल्कुल सटीक चित्रण...आज कल कुछ ऐसा ही खेल खेला जा रहा है इस ब्लॉग की दुनिया में...जल्द ही ऐसे माहौल से ब्लॉग जगत उबारें यहीं कामना है.....बढ़िया एवं सटीक प्रस्तुति ..मज़ा आ गया..धन्यवाद

Shah Nawaz said...

:-)

एकदम करारा व्यंग्य!

श्यामल सुमन said...

यह खेल भी तो नहीं है वर्मा जी।

अभी अभी जो ""सत्य" वरिष्ठ ब्लोगरो का दिमाग हुआ खाली, कुछ न बचा तो देते गाली {जूनियर ब्लोगर एसोसिएसन के हमले से धराशाई हुए, चापलूस ब्लाग्गर} सन्तोष कुमार" - पर जो टिप्पणीयों की झलक देखी है मन खिन्न हो गया है - क्या यही साहित्य है? हे भगवान?

सादर
श्यामल सुमन
09955373288
www.manoramsuman.blogspot.com

पी.सी.गोदियाल said...

हा-हा-हा-हा
आगे मैं लिख देता हूँ :
ये सीनियर जेंडर ब्लोगर बन रहा था,
और मैं जूनियर जेंडर, बीच में पता नहीं कहाँ से न्यूट्रल जेंडर ब्लोगर की बात छिड़ गई , बस शुरू हो गई !

sumit said...

ye to sach hai jaha char bartan hongnge waha awaj to hogi

ललित शर्मा said...

हा हा हा
वर्मा जी आज आपकी हिट पोस्ट है
अब तक तीन हिट हो चुकी है नापसंद की।

शुभकामानाएं

सतीश सक्सेना said...

वाकई हिट पोस्ट !ललित जी से सहमत हूँ ! शुभकामनायें

Kumar Jaljala said...

फिल्म- देशप्रेमी
गीत-महाकवि आनन्द बख्शी
संगीत- लक्ष्मीकांत- प्यारेलाल
नफरत की लाठी तोड़ो
लालच का खंजर फेंको
जिद के पीछे मत दौड़ो
तुम देश के पंछी हो देश प्रेमियों
आपस में प्रेम करो देश प्रेमियों
देखो ये धरती.... हम सबकी माता है
सोचो, आपस में क्या अपना नाता है
हम आपस में लड़ बैठे तो देश को कौन संभालेगा
कोई बाहर वाला अपने घर से हमें निकालेगा
दीवानों होश करो..... मेरे देश प्रेमियों आपस में प्रेम करो

मीठे पानी में ये जहर न तुम घोलो
जब भी बोलो, ये सोचके तुम बोलो
भर जाता है गहरा घाव, जो बनता है गोली से
पर वो घाव नहीं भरता, जो बना हो कड़वी बोली से
दो मीठे बोल कहो, मेरे देशप्रेमियों....

तोड़ो दीवारें ये चार दिशाओं की
रोको मत राहें, इन मस्त हवाओं की
पूरब-पश्चिम- उत्तर- दक्षिण का क्या मतलब है
इस माटी से पूछो, क्या भाषा क्या इसका मजहब है
फिर मुझसे बात करो
ब्लागप्रेमियों... आपस में प्रेम करो

Sonal Rastogi said...

sab kah diyaa ... ha ha ha

महफूज़ अली said...

ज़बरदस्त कटाक्ष........

'अदा' said...

ise kahte hain..bheega kar maarna...
bahut accha..!

विश्व रेडक्रास दिवस

विश्व रेडक्रास दिवस
विश्व रेडक्रास दिवस पर कविता पाठ 7 मई 2010

हिन्दी दिवस : काव्य पाठ

हिन्दी दिवस : काव्य पाठ
हिन्दी दिवस 2009

राजस्थान पत्रिका में 'यूरेका'

राजस्थान पत्रिका में 'यूरेका'

हमारी वाणी

www.hamarivani.com

ब्लागोदय


CG Blog

एग्रीगेटर्स

आपका पता

विजेट आपके ब्लॉग पर

ब्लागर परिवार

Blog parivaar

लालित्य

ग्लोबल भोजपुरी